पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। टीएमसी के 60 बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुन लिया है। साथ ही, अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद से सस्पेंड कर दिया गया है। क्या यह टीएमसी का अंत है?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। टीएमसी के 60 बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुन लिया है। साथ ही, अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद से सस्पेंड कर दिया गया है। क्या यह टीएमसी का अंत है?

TMC Crisis : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। न्यूटाउन में आयोजित एक विशेष बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को तृणमूल चेयरपर्सन के पद से हटा दिया है। इस राजनीतिक धमाके ने टीएमसी के भीतर मचे आंतरिक कलह को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। बागी गुट ने हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया चेयरपर्सन नियुक्त करने की घोषणा की है। इस फैसले ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधे चुनौती दी है। वहीं, रिताब्रता बनर्जी और उनके साथियों के नेतृत्व वाले इस ‘असली तृणमूल’ गुट ने पार्टी के कद्दावर नेता और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को ‘ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी’ के पद से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार को राज्य विधानसभा के बजट सत्र के समापन के बाद हुई। सत्र खत्म होते ही तृणमूल के बागी विधायकों ने न्यूटाउन के एक होटल में एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें तृणमूल के करीब 60 विधायक और कोलकाता के 70 से अधिक पूर्व पार्षद शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान एक 30 सदस्यीय ‘तृणमूल कमेटी’ के गठन का ऐलान किया गया। यह गुट खुद को पार्टी का असली उत्तराधिकारी बता रहा है और ममता बनर्जी के निर्णयों के खिलाफ लामबंद हो गया है।

तृणमूल कांग्रेस के इस ‘स्पेशल सेशन’ में राज्य भर से आए लगभग 500 नेताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें जिला स्तर के अध्यक्षों से लेकर विधायक और पूर्व पार्षद तक शामिल थे। बैठक में कम से कम 16 जिला अध्यक्षों की उपस्थिति ने ममता खेमे के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस दौरान नई नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन किया गया, जिसमें अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष, संदीपन साहा, जावेद खान और रिताब्रता बनर्जी को नेशनल जनरल सेक्रेटरी और फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास व रथिन घोष को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के संविधान का हवाला देते हुए बागी गुट ने दावा किया कि उन्होंने सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया है।
बागी गुट अब पूरी तरह से पार्टी की कमान अपने हाथों में लेने की तैयारी में है। विशेष सत्र के दौरान कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक बैंक खातों का नियंत्रण कैसे अपने पास रखा जाए। बागी नेताओं का कहना है कि वे अगले 21 दिनों के भीतर सभी फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन का पुनर्गठन करेंगे। पार्टी के मालिकाना हक और चुनावी चिन्ह को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज होने की संभावना है। ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ खड़ा हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और अधिक उठापटक देखने को मिल सकती है।
Read More : Lucknow Fire Update : लखनऊ अग्निकांड पर योगी सख्त कार्रवाई के निर्देश, पीएम मोदी ने मुआवजे की घोषणा की


© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company.
Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.
