Tomato Farming
Tomato Farming: भारतीय कृषि व्यवस्था में टमाटर एक ऐसी नकदी फसल है जिसकी मांग साल भर बनी रहती है। यह न केवल आम रसोई का अनिवार्य हिस्सा है, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों (Processing Industries) के लिए भी कच्चा माल उपलब्ध कराता है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बसंत और ग्रीष्मकालीन फसल के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण है। पूसा, दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि वे कम लागत में वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर अपनी आय को दोगुना कर सकें।
उत्तर भारत में टमाटर की सफल खेती के लिए समय का चुनाव बहुत मायने रखता है। आमतौर पर दिसंबर से जनवरी के बीच रोपाई करना सबसे उपयुक्त होता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जब तापमान बहुत कम हो या पाले की आशंका हो, तो रोपाई से बचना चाहिए। अत्यधिक ठंड पौधों के विकास को रोक सकती है। जैसे ही तापमान थोड़ा सामान्य होने लगे, किसानों को अपनी पौधशाला से पौधों की रोपाई मुख्य खेत में शुरू कर देनी चाहिए।
अच्छी पैदावार की पहली सीढ़ी सही किस्म का चुनाव है। पूसा के वैज्ञानिकों ने क्षेत्र के अनुसार उन्नत और हाइब्रिड बीजों के उपयोग की सलाह दी है। पूसा हाइब्रिड-1, पूसा उपहार, पूसा-120, पूसा शीतल और पूसा सदाबहार जैसी किस्में न केवल अधिक उत्पादन देती हैं, बल्कि इनकी गुणवत्ता भी बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है। ये किस्में विभिन्न जलवायु परिस्थितियों और रोगों के प्रति सहनशील मानी जाती हैं।
टमाटर की खेती के लिए उपजाऊ और अच्छी जल निकास वाली रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेत की तैयारी के समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मिट्टी में जैविक पदार्थों की प्रचुरता हो। वैज्ञानिकों के अनुसार, खेत में जलभराव की स्थिति फसल को पूरी तरह बर्बाद कर सकती है, इसलिए खेत को समतल करना और जल निकासी की उचित व्यवस्था करना अनिवार्य है। मिट्टी का पीएच मान (pH value) सामान्य होने पर फलों का आकार और रंग बेहतर आता है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए बीजों की सही मात्रा और पौधों के बीच की दूरी का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्नत किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 350-400 ग्राम बीज और हाइब्रिड किस्मों के लिए 200-250 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। रोपाई करते समय पौधों के बीच की दूरी किस्म के अनुसार तय करनी चाहिए। सीमित बढ़वार वाली किस्मों के लिए 60×60 सेंटीमीटर और असीमित बढ़वार वाली किस्मों के लिए 75-90×60 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए। शाम के समय रोपाई करना पौधों के जमने के लिए सबसे अच्छा रहता है।
टमाटर एक भारी पोषक तत्व चाहने वाली फसल है। खेत तैयार करते समय प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालना मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखता है। इसके अलावा, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उर्वरकों की टॉप ड्रेसिंग को दो हिस्सों में बांटकर देने से पौधों में फूल और फल आने की प्रक्रिया तेज होती है।
फसल की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना जरूरी है। खरपतवार न केवल पोषक तत्वों को चुराते हैं, बल्कि कीटों को भी आश्रय देते हैं। नमी बनाए रखने के लिए पुआल या सूखी घास से मल्चिंग करना एक प्रभावी तरीका है। झुलसा रोग (Blight) से बचाव के लिए किसानों को प्रमाणित बीजों का उपयोग करना चाहिए और लक्षण दिखने पर तुरंत अनुशंसित फफूंदनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान निश्चित रूप से टमाटर की खेती को लाभ का सौदा बना सकते हैं।
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