Tonk Notice War: राजस्थान की भजनलाल सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के गृह क्षेत्र और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के प्रभार वाले जिले टोंक में एक अजीबोगरीब प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। यहाँ विकास कार्यों में समन्वय की जगह दो सरकारी विभाग—विद्युत विभाग और नगर पालिका—एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलकर खड़े हो गए हैं। अधिकारियों के बीच शुरू हुई यह “कलम की जंग” अब करोड़ों रुपये के नोटिस और अल्टीमेटम तक पहुँच गई है। यह मामला न केवल चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि आमजन के लिए भी असुविधा का कारण बन रहा है, क्योंकि विभागों की इस लड़ाई में सार्वजनिक व्यवस्थाएं दांव पर लगी हैं।

बिजली बिल बकाया होने पर कटा कनेक्शन: 3.50 करोड़ का विवाद
पूरा विवाद टोंक जिले के मालपुरा कस्बे से शुरू हुआ। यहाँ नगर पालिका प्रशासन पर पिछले लंबे समय से रोड लाइटों के बिल का करीब 3.50 करोड़ रुपये बकाया है। विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता केएल पटेल के अनुसार, इस भारी भरकम राशि की वसूली के लिए विभाग ने नगर पालिका, उपखंड अधिकारी और यहाँ तक कि जिला कलेक्टर को भी कई बार लिखित अनुरोध किया। जब बार-बार याद दिलाने के बाद भी बिल का भुगतान नहीं हुआ, तो विद्युत विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए कस्बे की रोड लाइटों का कनेक्शन काट दिया। अँधेरे में डूबे कस्बे ने इस प्रशासनिक विवाद को और हवा दे दी।
नगर पालिका का पलटवार: बिजली विभाग को थमाया 13 करोड़ का नोटिस
जैसे ही विद्युत विभाग ने कनेक्शन काटा, नगर पालिका प्रशासन ने इसे अपनी कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार माना। जवाब में, नगर पालिका ने एक कदम आगे बढ़ते हुए विद्युत विभाग को ही यूडी टैक्स (Urban Development Tax) का नोटिस थमा दिया। इस नोटिस में दावा किया गया है कि विद्युत विभाग के कार्यालयों, पावर हाउस और यहाँ तक कि बिजली के खंभों का कुल 13 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है। नगर पालिका ने इस भारी भरकम राशि को जमा करने के लिए विभाग को मात्र दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। इस जवाबी कार्रवाई ने दोनों विभागों के बीच के तनाव को “ईगो वार” में बदल दिया है।
अधिकारियों का तर्क: नोटिस को बताया द्वेषपूर्ण और नियम विरुद्ध
विद्युत विभाग के अधिकारियों ने नगर पालिका द्वारा दिए गए 13 करोड़ के नोटिस को पूरी तरह से आधारहीन और बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। अधीक्षण अभियंता केएल पटेल का कहना है कि यह नोटिस केवल बिजली बिल के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जिला मुख्यालय पर नगर परिषद का यूडी टैक्स महज 2 लाख रुपये के आसपास बनता है, ऐसे में मालपुरा जैसे छोटे कस्बे में 13 करोड़ का टैक्स होना समझ से परे है। विभाग का कहना है कि नियमानुसार टैक्स की राशि को बिलों के साथ समायोजित किया जा सकता है, लेकिन इस तरह का भारी-भरकम नोटिस पूरी तरह गलत है।
सवालों के घेरे में मंत्रियों की जिम्मेदारी और जनता की परेशानी
विडंबना यह है कि यह पूरा विवाद उन मंत्रियों के क्षेत्र में हो रहा है जिन पर राज्य के विकास और ऊर्जा की जिम्मेदारी है। एक तरफ कन्हैयालाल चौधरी स्थानीय विधायक और मंत्री हैं, तो दूसरी तरफ हीरालाल नागर स्वयं ऊर्जा मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री हैं। विभागों की इस आपसी खींचतान ने सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। जहाँ बिजली विभाग बिल के भुगतान का इंतजार कर रहा है, वहीं नगर पालिका प्रशासन अपने दो दिन के अल्टीमेटम के खत्म होने की राह देख रहा है। इस खींचतान में मालपुरा की जनता रात के समय सड़कों पर अँधेरे का सामना करने को मजबूर है।


















