Middle East War : मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल युद्ध के शुरू हुए अभी महज छह दिन बीते हैं, लेकिन हिंसा और तबाही के मंजर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद से पूरा क्षेत्र एक ‘चेन रिएक्शन’ की चपेट में है। इस भीषण संघर्ष के बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमीर जेलेंस्की ने एक ऐसा चौंकाने वाला दावा किया है, जो इस युद्ध की भयावहता और इसमें इस्तेमाल हो रहे हथियारों के पैमाने को उजागर करता है।
पैट्रियट मिसाइलों का भारी इस्तेमाल: जेलेंस्की का बड़ा दावा
पिछले चार वर्षों से रूसी आक्रमण का सामना कर रहे जेलेंस्की ने बताया कि मिडिल ईस्ट में ईरानी ड्रोनों को रोकने के लिए जिस गति से मिसाइलें दागी जा रही हैं, वह अकल्पनीय है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने पिछले 6 दिनों में जितनी पैट्रियट PAC-3 मिसाइलें इस्तेमाल की हैं, उतनी तो यूक्रेन ने पिछले 4 साल के युद्ध में भी नहीं कीं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में लगभग 800 पैट्रियट मिसाइलें दागी जा चुकी हैं, जो यूक्रेन को अब तक मिली कुल मिसाइलों की संख्या से भी अधिक है।
डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से मांगी सहायता: ड्रोनों से सुरक्षा की गुहार
जेलेंस्की ने खुलासा किया है कि खाड़ी देशों को ईरानी ड्रोनों के कहर से बचाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने उनसे संपर्क किया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका की ओर से सहायता का अनुरोध आया है।” जेलेंस्की ने निर्देश दिए हैं कि यूक्रेन के विशेषज्ञ और जरूरी तकनीकी साधन वहां उपलब्ध कराए जाएं ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। जब इस बारे में डोनाल्ड ट्रंप से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “मैं किसी भी देश से मिलने वाली मदद स्वीकार करने को तैयार हूं।”
महंगी मिसाइलें बनाम सस्ते ड्रोन: तकनीक और रणनीति का संकट
ईरान इस समय बड़े पैमाने पर ‘शाहेद’ जैसे आत्मघाती ड्रोनों का उपयोग कर रहा है। ये वही ड्रोन हैं जिनका सामना यूक्रेन पिछले कई वर्षों से रूसी हमलों के दौरान कर रहा है। समस्या यह है कि अमेरिका के सहयोगी देश इन सस्ते ड्रोनों को गिराने के लिए अत्यंत महंगी पैट्रियट PAC-3 मिसाइलों का उपयोग कर रहे हैं। जेलेंस्की ने आगाह किया है कि अगर इसी तरह मिसाइलों का भंडार खत्म होता रहा, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। यूक्रेन चाहता है कि वह अपने अनुभव का उपयोग कर सस्ते ‘इंटरसेप्टर’ प्रदान करे और बदले में अपनी सुरक्षा के लिए कुछ मिसाइलें हासिल करे।
यूक्रेन की मदद की शर्तें: सुरक्षा और कूटनीति सर्वोपरि
हालांकि जेलेंस्की मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए कड़ी शर्तें भी रखी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यूक्रेन की सहायता तभी संभव होगी जब इससे कीव की अपनी रक्षा व्यवस्था कमजोर न हो। उन्होंने कहा, “हमारा प्राथमिक लक्ष्य यूक्रेन की सुरक्षा है। हम तभी मदद देंगे जब इससे हमारी कूटनीतिक क्षमता मजबूत हो और हमें बदले में आवश्यक सैन्य उपकरण मिलें।” यूक्रेन इस समय खाड़ी देशों के साथ बातचीत कर एक ऐसा समझौता करना चाहता है जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो।
ईरानी जवाबी हमला: सुप्रीम लीडर की मौत के बाद दहला मिडिल ईस्ट
मिडिल ईस्ट में मौजूदा हिंसा की तीव्रता का मुख्य कारण ईरान का प्रतिशोध है। अपने सुप्रीम लीडर को खोने के बाद ईरान ने जिस तरह से ड्रोन हमलों की झड़ी लगाई है, उसने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव डाल दिया है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस और ईरान के ड्रोन हमलों का पैटर्न एक जैसा है, और यूक्रेन के पास इन ‘कामिकेज़’ ड्रोनों से निपटने का सबसे सटीक अनुभव है। अब देखना यह है कि क्या यूक्रेन की यह विशेषज्ञता मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने या कम से कम तबाही रोकने में कारगर साबित होती है।
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