Trump Attacks Abdul El-Sayed : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिशिगन में चुनावी रैली के दौरान डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद पर तीखे हमले किए। रविवार, 25 अक्टूबर को पोर्ट ह्यूरन में आयोजित रैली में ट्रंप ने अल-सैयद को कथित तौर पर मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा बताया और उन्हें ‘जिहादी’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने मतदाताओं से रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन करने की अपील की। ट्रंप ने अल-सैयद की संभावित जीत को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या उन्हें सीनेट में संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच मिलनी चाहिए। हालांकि, अल-सैयद ने मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध होने के आरोपों को लगातार खारिज किया है।

9/11 हमलों का जिक्र कर क्या बोले ट्रंप?
रैली के दौरान ट्रंप ने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए टॉड बीमर का उदाहरण दिया। बीमर यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 में सवार थे। इस विमान के यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं का मुकाबला किया था, हालांकि विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। ट्रंप ने कहा कि मिशिगन के लोगों को बीमर की तरह आगे आकर लड़ना चाहिए, ताकि उनके शब्दों में किसी ‘जिहादी’ को अमेरिकी कैपिटल तक पहुंचने से रोका जा सके। उन्होंने अल-सैयद की तुलना आतंकियों से करते हुए उनके खिलाफ अपना चुनावी हमला और तेज कर दिया।

शरिया कानून को लेकर ट्रंप का आरोप
रैली से पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी अल-सैयद को निशाना बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अल-सैयद अमेरिका में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर अल-सैयद सीनेट चुनाव जीतते हैं, तो उनकी सुरक्षा जांच होनी चाहिए। उन्होंने मजाकिया लेकिन विवादास्पद अंदाज में कहा कि अल-सैयद को सीनेट में प्रवेश करने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए। इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से प्रमाणित साक्ष्य सामने नहीं आए हैं, जबकि अल-सैयद इन दावों को गलत बताते रहे हैं।
मुस्लिम ब्रदरहुड पर अल-सैयद ने क्या जवाब दिया?
अब्दुल अल-सैयद ने अपने धार्मिक विश्वासों और अमेरिकी संविधान के प्रति निष्ठा को लेकर उठाए गए सवालों का विरोध किया है। हाल ही में मिशिगन के कारो में एक टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया था कि क्या वह मुस्लिम ब्रदरहुड से दूरी बनाएंगे। इस पर उन्होंने कहा कि वह ऐसा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन सवाल पूछने के पीछे की धारणा पर भी आपत्ति जताई। अल-सैयद ने कहा कि इस तरह का सवाल उनकी निष्ठा को दो हिस्सों में बंटा हुआ मानकर चलता है। उन्होंने अमेरिकी संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
मिशिगन सीनेट चुनाव में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
मिशिगन की सीनेट सीट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अल-सैयद और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोजर्स पूर्व कांग्रेस सदस्य हैं और ट्रंप ने अपनी रैली में उनके समर्थन की अपील की। यह चुनाव 3 नवंबर 2026 को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का हिस्सा है। चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय सुरक्षा, धार्मिक पहचान और उम्मीदवारों की राजनीतिक निष्ठा जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। अल-सैयद के समर्थकों ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की आलोचना की है, जबकि रिपब्लिकन नेताओं ने उनके राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव से पहले आरोपों का क्या होगा असर?
ट्रंप के बयान ने मिशिगन के चुनावी माहौल में धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। अल-सैयद ने कहा है कि उनकी अमेरिकी संविधान के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाना अनुचित है। दूसरी ओर, ट्रंप और उनके सहयोगियों ने मतदाताओं के सामने अल-सैयद को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं रखी हैं। चुनाव में इन बयानों का कितना असर पड़ेगा, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, उम्मीदवारों की नीतियों के साथ-साथ आरोपों और उनके जवाबों पर भी मतदाताओं की नजर बनी हुई है।
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