Trump's Big Claim
Trump’s Big Claim: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, लगातार सैन्य और आर्थिक दबाव के बाद अब ईरान ‘घुटनों पर’ आ गया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही एक बड़ी डील होने की संभावना है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान ने प्रस्तावित 15 सूत्रीय शांति योजना के अधिकांश बिंदुओं पर अपनी सहमति जता दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता, अमेरिका की ओर से युद्ध और बातचीत की दोहरी रणनीति जारी रहेगी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया घटनाक्रमों को सकारात्मक बताते हुए कहा कि ईरान अब समझौते के लिए गंभीर दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से अमेरिका के 20 बड़े तेल टैंकरों को बिना किसी बाधा के गुजरने दिया है। ट्रंप ने इसे एक “सकारात्मक संकेत” करार दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले परमाणु वार्ता के कई दौर विफल रहे थे। 28 फरवरी से पहले भी तीन बार बातचीत की कोशिश की गई थी, लेकिन ईरान द्वारा अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को बंद करने से इनकार करने के बाद गतिरोध पैदा हो गया था। ट्रंप ने साफ किया कि यदि बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका जमीनी हमले से भी पीछे नहीं हटेगा।
अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते की जमकर आलोचना की। उन्होंने इसे “अमेरिका के इतिहास का सबसे खराब समझौता” बताया। ट्रंप का तर्क है कि यदि वर्तमान सरकार ने उस समझौते को रद्द नहीं किया होता, तो आज ईरान एक पूर्ण परमाणु शक्ति संपन्न देश बन चुका होता और पूरी दुनिया के लिए खतरा पैदा कर देता। उन्होंने गर्व से कहा कि उनकी सरकार ने उस कमजोर डील को खत्म करके दुनिया को सुरक्षित किया है। ट्रंप के अनुसार, उनकी सख्त नीतियों के कारण ही आज ईरान बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है, अन्यथा वह पूरी दुनिया को अपने कदमों तले रखने की योजना बना रहा था।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान के हौसले पस्त कर दिए हैं। परमाणु ठिकानों पर की गई बमबारी ने न केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दशकों पीछे धकेल दिया है, बल्कि उसे हथियार बनाने से भी रोक दिया है। राष्ट्रपति ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान में पहले ही सत्ता परिवर्तन की नींव रखी जा चुकी है। उनके अनुसार, ईरान का पुराना नेतृत्व और उसकी विचारधारा अब नष्ट होने की कगार पर है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इतिहास में अमेरिका ने आज तक किसी भी देश के साथ इतनी सख्ती और प्रभावी ढंग से न्याय नहीं किया है, जितना वह वर्तमान में ईरान के साथ कर रहा है।
भले ही ट्रंप ने समझौते की उम्मीद जताई है, लेकिन उन्होंने अपनी शैली में अनिश्चितता का पुट भी बनाए रखा। उन्होंने कहा, “ईरान के साथ कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।” बार-बार की बातचीत के बाद अंततः सैन्य कार्रवाई की नौबत आने का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली अगली सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत पर टिकी हैं। यदि यह 15 सूत्रीय समझौता सफल रहता है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में इस सदी का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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