Trump Iran War
Trump Iran War : मिडिल ईस्ट में पिछले एक महीने से जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी भावी रणनीतियों का खुलासा करते हुए वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा कि ईरान का तेल लेना और उसके प्रमुख ईंधन केंद्रों पर कब्जा करना उनकी प्राथमिकता है।
ट्रंप ने अपने बयान में विशेष रूप से ईरान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘खर्ग द्वीप’ का उल्लेख किया। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में ले सकता है। ट्रंप के अनुसार, “हो सकता है कि हम खर्ग द्वीप ले लें, या हो सकता है कि हम ऐसा न करें, लेकिन हमारे पास विकल्पों की कमी नहीं है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस कदम का अर्थ यह होगा कि अमेरिकी सेना को एक लंबे समय तक वहां रुकना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इस समय लगभग 3,500 अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट पहुंच चुके हैं, जिससे ईरान में अमेरिकी सेना के सीधे प्रवेश की आशंकाएं और प्रबल हो गई हैं।
जब राष्ट्रपति ट्रंप से खर्ग द्वीप की सुरक्षा और ईरान की सैन्य तैयारियों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाक अंदाज में जवाब दिया। ट्रंप ने ईरान की रक्षा प्रणाली को कमतर आंकते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई प्रभावी डिफेंस (सुरक्षा) है। हम इसे बहुत आसानी से अपने कब्जे में ले सकते हैं।” उनके इस बयान को रणनीतिक विशेषज्ञों द्वारा ईरान के प्रति मनोवैज्ञानिक युद्ध के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने उन लोगों को ‘बेवकूफ’ करार दिया जो अमेरिका द्वारा दूसरे देशों के तेल संसाधनों पर नियंत्रण करने की नीति की आलोचना करते हैं।
युद्ध की इन धमकियों के बीच एक दिलचस्प कूटनीतिक पहलू भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के “दूतों” के माध्यम से दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद चल रहा है और यह प्रक्रिया सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि क्या निकट भविष्य में किसी युद्धविराम समझौते की उम्मीद की जा सकती है, तो उन्होंने इस पर कोई भी ठोस टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
रविवार को अपने आधिकारिक विमान ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजरायल युद्ध के दबाव के कारण ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) पहले ही हो चुका है। ट्रंप के अनुसार, युद्ध में मारे गए ईरानी नेताओं की संख्या और वहां की आंतरिक स्थितियों ने सत्ता के ढांचे को बदल दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अमेरिका अब पहले की तुलना में पूरी तरह से अलग लोगों के समूह के साथ काम कर रहा है और उन्हें उम्मीद है कि वे ईरान के नए नेतृत्व के साथ एक नया “समझौता” करने में सफल रहेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब पूरा मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर बैठा है। तेल संसाधनों पर कब्जे की बात और खुलेआम तख्तापलट का दावा क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इन तीखे बयानों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या वास्तव में अमेरिका वहां सैन्य हस्तक्षेप की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
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