Donald Trump Iran War Victory: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब अपने पांचवें दिन को पार कर चुका है, और हमलों की तीव्रता घटने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने के लिए पेश किया गया ‘वार पावर्स रेजोल्यूशन’ (War Powers Resolution) गिर गया है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना विधायी अनुमति के सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों पर अंकुश लगाने और किसी भी बड़े हमले से पहले कांग्रेस की अनिवार्य मंजूरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया था।
वोटिंग का गणित: ट्रंप के पक्ष में लामबंद हुए रिपब्लिकन सांसद
इस महत्वपूर्ण बिल पर हुई वोटिंग के दौरान अमेरिकी संसद के उच्च सदन में तीखा विभाजन देखने को मिला। अधिकांश रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीतियों का खुलकर समर्थन किया। अंतिम परिणामों में इस प्रस्ताव को 47 के मुकाबले 53 मतों से अस्वीकार कर दिया गया। हालांकि, कुछ अपवाद भी देखने को मिले; केंटकी के रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने पार्टी लाइन से हटकर बिल के समर्थन में वोट दिया, जबकि पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इसके विरोध में मतदान किया। शेष मतदान पूरी तरह से दलीय आधार पर विभाजित रहा, जिससे ट्रंप प्रशासन को एक बड़ी विधायी जीत हासिल हुई।
व्हाइट हाउस की रणनीतिक जीत: अब ईरान पर हमलों के लिए खुली छूट
इस बिल के खारिज होने का सीधा अर्थ यह है कि ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ सैन्य निर्णय लेने के लिए अब अमेरिकी कांग्रेस के लंबे गलियारों के चक्कर नहीं काटने होंगे। यदि यह बिल पास हो जाता, तो ईरान पर किसी भी बड़े हमले या पूर्ण युद्ध की घोषणा से पहले कांग्रेस की पूर्व अनुमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता। जानकारों का मानना है कि इस जीत से राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध के मैदान में त्वरित और कठोर निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई है। यह उनके प्रशासन की उस रणनीति को मजबूती देता है, जिसमें वे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय सैन्य दबाव से झुकाने की नीति अपना रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम लोकतांत्रिक जवाबदेही
वोटिंग के बाद दोनों पक्षों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह वोट तय करने वाला था कि सीनेटर अमेरिकी जनता के संवैधानिक अधिकारों के साथ हैं या राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के व्यक्तिगत निर्णयों के साथ। दूसरी ओर, रिपब्लिकन नेता जॉन बरासो ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्षी दल राष्ट्रपति के हाथ बांधने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इस समय सबसे बड़ा और असली मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए समाप्त करना है ताकि वैश्विक शांति सुनिश्चित की जा सके।
खतरे में अमेरिकी सैनिक: आठ हफ्तों तक खिंच सकता है यह भीषण संघर्ष
धरातल पर युद्ध की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने की खबर है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष कम से कम आठ हफ्तों तक चल सकता है, जो उनकी पिछली समयसीमा से कहीं अधिक है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी पुष्टि की है कि मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिक अभी भी सीधे खतरे में हैं। हाल ही में कुवैत में हुए एक ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत ने इस खतरे को और अधिक वास्तविक बना दिया है।
Read More: Rajya Sabha Election 2026: कांग्रेस ने फाइनल किए उम्मीदवार, क्या नीतीश कुमार छोड़ेंगे सीएम पद?
















