Iran War 2026
Iran War 2026: मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रणनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों से बड़े झटके लगे हैं। ब्रिटेन और स्पेन ने इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से हाथ खींच लिए हैं, जिससे वाशिंगटन की सैन्य योजनाएं प्रभावित होती दिख रही हैं। एक तरफ जहां यूके ने अपनी सेना भेजने से साफ मना कर दिया है, वहीं स्पेन ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक घेराबंदी को कमजोर कर दिया है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि यूके इस युद्ध में अपनी सेना नहीं भेजेगा। स्टार्मर ने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन इस संघर्ष में किसी भी तरह की सीधी भागीदारी से खुद को अलग रखता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “यह हमारी लड़ाई नहीं है और हम इसमें शामिल नहीं होंगे।” प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि रॉयल एयरफोर्स और ब्रिटिश सेना की भूमिका केवल रक्षात्मक (Defensive) बनी रहेगी। ब्रिटेन का प्राथमिक लक्ष्य अपने नागरिकों की जान बचाना, अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और क्षेत्र में सहयोगियों को सुरक्षा प्रदान करना है, न कि किसी आक्रामक युद्ध का हिस्सा बनना।
हालांकि ब्रिटेन ने अपनी सेना भेजने से इनकार कर दिया है, लेकिन उसने कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। पीएम स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को व्यापार के लिए फिर से खोलने के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो। दिलचस्प बात यह है कि सेना न भेजने के बावजूद, लंदन ने अमेरिका को एक बड़ी राहत दी है। ब्रिटेन ने अमेरिकी वायुसेना को ईरानी ठिकानों पर हमला करने के लिए अपने सैन्य अड्डों (British Bases) के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। यह कदम दिखाता है कि ब्रिटेन युद्ध में सीधे नहीं कूदना चाहता, लेकिन वह पर्दे के पीछे से अमेरिका की मदद के लिए तैयार है।
अमेरिका के लिए सबसे बड़ा झटका स्पेन से आया है। स्पेनिश सरकार ने ईरान युद्ध में शामिल किसी भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया है। स्पेन ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि उसके ‘रोटा’ और ‘मोरोन’ सैन्य अड्डों का इस्तेमाल न तो हमले के लिए किया जाएगा और न ही विमानों में ईंधन भरने (Refueling) के लिए। स्पेन के इस सख्त रुख के कारण अमेरिका को अपनी योजना बदलनी पड़ी है और उसने मोरोन एयर बेस पर अपने शक्तिशाली B-52 और B-1 बॉम्बर विमानों को तैनात करने का इरादा फिलहाल छोड़ दिया है।
स्पेन के अर्थव्यवस्था मंत्री ने इस प्रतिबंध के पीछे कानूनी और नैतिक तर्क दिए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध में हिस्सा लेने वाली उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सख्ती से पालन करना है। स्पेन का मानना है कि इस संघर्ष में सीधे तौर पर सैन्य सहायता देना वैश्विक शांति के सिद्धांतों के विरुद्ध हो सकता है। स्पेन के इस फैसले ने नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या अमेरिका को इस युद्ध में यूरोपीय देशों का पूर्ण समर्थन मिल पाएगा या नहीं।
ब्रिटेन और स्पेन के इन फैसलों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। बिना सहयोगियों के सक्रिय समर्थन के, ईरान जैसे देश के खिलाफ पूर्ण स्तर का युद्ध लड़ना अमेरिका के लिए न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामरिक रूप से भी महंगा साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन अपने सहयोगियों को मनाने में कामयाब होता है या फिर अमेरिका को इस मोर्चे पर अकेले ही आगे बढ़ना पड़ेगा।
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