Trump mocks Macron
Trump mocks Macron: वाशिंगटन में एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया संबोधन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए उन पर तीखा तंज कसा है। ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी सख्त व्यापारिक नीतियों और टैरिफ की चेतावनी के सामने फ्रांस को झुकना पड़ा। ट्रंप का यह बयान न केवल कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि इसने अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच जारी आर्थिक प्रतिस्पर्धा को भी एक नई दिशा दे दी है।
रिपब्लिकन सांसदों के एक महत्वपूर्ण सम्मेलन को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने फ्रांस से आने वाली दवाओं और अन्य उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की योजना बनाई थी। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने मैक्रों को चेतावनी दी थी कि यदि फ्रांस अमेरिकी मांगों को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका में आयात होने वाली फ्रांसीसी दवाओं, शैंपेन और वाइन पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए उठाया गया था।
ट्रंप ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका दशकों से वैश्विक स्वास्थ्य सेवा को सब्सिडी देता आ रहा है, जो अमेरिकी नागरिकों के साथ अन्याय है। उन्होंने दावा किया कि प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के लिए अमेरिकी उपभोक्ता फ्रांसीसी उपभोक्ताओं की तुलना में 14 गुना अधिक भुगतान कर रहे थे। राष्ट्रपति ने इसे सुधारने के लिए अपनी “मोस्ट फेवर्ड नेशन” नीति का उपयोग किया। उन्होंने फ्रांसीसी नेतृत्व से मांग की कि वे अपनी दवाओं की कीमतें बढ़ाएं ताकि अमेरिका पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम हो सके और वैश्विक बाजार में एक समानता आए।
ट्रंप ने एक बेहद नाटकीय अंदाज में मैक्रों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि टैरिफ की धमकी ने काम किया और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मांगों के आगे झुक गए। ट्रंप के मुताबिक, मैक्रों ने उनसे फोन पर कहा, “डोनाल्ड, मैं आपकी बात मानने को तैयार हूँ। मैं दवाओं की कीमतें 200 प्रतिशत तक बढ़ा दूंगा, लेकिन कृपया इस बारे में जनता को कुछ मत बताइएगा, मैं आपसे विनती करता हूँ।” ट्रंप ने यहाँ तक दावा किया कि केवल फ्रांस ही नहीं, बल्कि हर उस देश ने यही रुख अपनाया है जिसे उन्होंने टैरिफ की चेतावनी दी थी।
ट्रंप के अनुसार, इस कूटनीतिक जीत का सीधा फायदा अमेरिकी नागरिकों को मिल रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी नीतियों के कारण फ्रांस में जो दवा 10 डॉलर प्रति गोली मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 30 डॉलर हो गई है, जबकि इसके विपरीत अमेरिका में दवाओं की कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि ट्रंप के इन दावों ने सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन फ्रांस की सरकार या इमैनुएल मैक्रों की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह चुप्पी इस विवाद को और अधिक हवा दे रही है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह रवैया उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से मित्र देशों के साथ संबंधों में खटास आ सकती है, लेकिन ट्रंप का मानना है कि व्यापार में कड़ाई ही अमेरिका के हितों की रक्षा का एकमात्र रास्ता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश ट्रंप के इन दावों का मुकाबला किस तरह से करते हैं और वैश्विक व्यापार मंच पर इसके क्या परिणाम निकलते हैं।
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