Trump Modi reply : राज्यसभा सांसद और आरजेडी के वरिष्ठ नेता मनोज झा ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया विवादित टिप्पणियों और खुद को बार-बार वैश्विक संघर्षों में “मध्यस्थ” और “नोबेल पुरस्कार योग्य” बताने के दावों को लेकर तीखा बयान दिया है। झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे प्रत्यक्ष रूप से ट्रंप को जवाब दें और इस विषय पर संसद में खुलकर चर्चा हो।
मनोज झा ने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को दुनिया का सरपंच घोषित कर लिया है। वह बार-बार दावा करते हैं कि उन्होंने युद्ध रोका, शांति स्थापित की, और नोबेल पुरस्कार के योग्य हैं। अब तक वह 24-25 बार ऐसे दावे कर चुके हैं, और शायद उन्हें गिनती भी याद नहीं होगी।” उन्होंने कहा कि यह वक्त मौन रहने का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के स्तर से प्रतिकार और संदेश देने का है, ताकि वैश्विक मंच पर भारत की गरिमा बनी रहे। मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले पर संसद में बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “ये देश के मिजाज का सवाल है। राजनीतिक दल आते-जाते रहेंगे, लेकिन ये घटनाएं इतिहास में दर्ज हो जाएंगी, इसलिए इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
झा ने कहा कि पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक मंच पर भारत के अकेले पड़ जाने जैसे मुद्दे केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जुड़े विषय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वो उदारता दिखाए और इन सवालों पर खुलकर बहस हो।
राज्यसभा में चर्चा की मांग करते हुए उन्होंने कहा, “आज की सरकार कल नहीं होगी, लेकिन इस अध्याय को हम भुला नहीं सकते। देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को लेकर गंभीर चिंता है, और ट्रंप जैसे नेता अगर बार-बार भारत को लेकर अनावश्यक टिप्पणियां करें, तो उन्हें जवाब जरूर मिलना चाहिए।”
मनोज झा ने बिहार की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में SIR (Social Impact Report) जैसी व्यवस्थाओं में लोगों को दाखिल होने की जगह बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने इस विषय पर चुनाव आयोग को पत्र लिखा है और यह भारतीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए खतरा है।
उन्होंने पूछा, “जब इतने गंभीर मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं होगी तो फिर संसद किस काम की?” झा ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र की नींव हिल रही है, और ऐसे समय में संसद की चुप्पी न्यायिक व राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से ख़तरनाक है।मनोज झा का यह बयान भारत की विदेश नीति, लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैश्विक मंचों पर देश की छवि को लेकर उठते प्रश्नों की ओर इशारा करता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे ट्रंप के बयानों का जवाब देकर यह संदेश दें कि भारत कोई छोटा देश नहीं, बल्कि एक संप्रभु लोकतंत्र है जो अपनी गरिमा की रक्षा करना जानता है।उनके बयान का मकसद राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को बनाए रखने से जुड़ा बताया जा रहा है।
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