Trump Muslim Brotherhood
ईरान में जारी भारी उथल-पुथल और तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा धमाका किया है। ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार, 13 जनवरी को मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र, जॉर्डन और लेबनान शाखाओं को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इस फैसले ने न केवल अमेरिका की विदेश नीति को और सख्त कर दिया है, बल्कि मुस्लिम देशों के बीच भी खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम को इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है, जो मध्य पूर्व में समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) ने लेबनान की मुस्लिम ब्रदरहुड शाखा, जिसे ‘जमाआ इस्लामिया’ भी कहा जाता है, को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ (FTO) और ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) की श्रेणी में डाल दिया है। इसके साथ ही संगठन के प्रमुख नेता मुहम्मद फौजी तक्कोश पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मिस्र और जॉर्डन की शाखाओं को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उन पर ‘हमास’ को प्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुँचाने का आरोप है। इस फैसले के बाद, इन संगठनों की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियां तुरंत फ्रीज कर दी जाएंगी और किसी भी अमेरिकी नागरिक के लिए इनके साथ व्यापार या वित्तीय लेन-देन करना एक गंभीर अपराध माना जाएगा।
बुधवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत कर सबको चौंका दिया है। सऊदी अरब ने इस कदम को क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए “ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण” बताया। गौर करने वाली बात यह है कि सऊदी अरब ने 2014 से ही इस संगठन को अपने यहाँ प्रतिबंधित कर रखा है। सऊदी की इस प्रतिक्रिया ने अन्य अरब देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी के इस रुख से उन देशों पर दबाव बढ़ेगा जो अब तक मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर नरम रुख रखते थे।
सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ट्रंप प्रशासन के इस फैसले की सराहना की है। मिस्र की सरकार ने इसे एक “महत्वपूर्ण कदम” करार दिया जो संगठन की उग्रवादी विचारधारा को बेनकाब करता है। यूएई ने भी अपनी सहमति जताते हुए कहा कि यह कदम मध्य पूर्व में स्थिरता लाने के लिए जरूरी था। दूसरी ओर, मुस्लिम ब्रदरहुड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने बयान जारी कर कहा है कि वह इस ‘आतंकवादी’ लेबल को अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कानूनी रूप से चुनौती देगा।
मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में मिस्र में हुई थी और यह दुनिया के सबसे पुराने और प्रभावशाली इस्लामी राजनीतिक संगठनों में से एक है। यह संगठन ‘राजनीतिक इस्लाम’ को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। सऊदी अरब, रूस, बहरीन और मिस्र जैसे देश इसे उग्रवाद और राजनीतिक अस्थिरता का मुख्य स्रोत मानते हैं। अमेरिका का यह ताजा कदम नवंबर 2025 में हस्ताक्षरित राष्ट्रपति ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी हितों के लिए खतरा बनने वाले समूहों को जड़ से मिटाना है। हमास के साथ इसके कथित संबंधों ने आग में घी डालने का काम किया है।
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