Trump on nuclear war : पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष और उसके बाद हुए सीजफायर का श्रेय खुद को दिया है। ट्रंप ने कहा कि यदि उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो यह संघर्ष सिर्फ एक हफ्ते में परमाणु युद्ध में तब्दील हो जाता। उन्होंने यह बयान ओवल ऑफिस में नाटो महासचिव मार्क रट के साथ बैठक के दौरान दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका ने उनकी नीतियों के तहत दुनिया भर में चल रहे युद्धों को काफी हद तक थामा है। उन्होंने कहा, “चाहे वो भारत-पाकिस्तान का टकराव हो या फिर अफ्रीका के रवांडा और कांगो में तीन दशक से जारी संघर्ष, हम युद्ध रोकने में सफल रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उन्होंने व्यापार को कूटनीति के रूप में इस्तेमाल किया, और उसी के चलते भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो सका।
ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष जिस तेजी से आगे बढ़ रहा था, वह एक भयंकर परमाणु युद्ध में बदल सकता था। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि यदि हमने हस्तक्षेप न किया होता तो यह संघर्ष एक हफ्ते के भीतर विनाशकारी युद्ध का रूप ले लेता।”
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को साफ संकेत दिया कि जब तक यह संघर्ष नहीं सुलझाया जाएगा, अमेरिका उनसे व्यापार को लेकर कोई बातचीत नहीं करेगा। ट्रंप के अनुसार, इसी दबाव के चलते दोनों देशों ने सीजफायर पर सहमति जताई और स्थिति नियंत्रण में आई।
गौरतलब है कि 10 मई को डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का दावा किया था। यह ट्वीट तब आया था जब दोनों देशों के बीच संघर्ष तीन दिन से जारी था और स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी।
इससे पहले, भारत ने 6-7 मई के बीच पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से एक सैन्य अभियान चलाया था। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकियों के लॉन्चपैड और ट्रेनिंग कैंपों को निशाना बनाते हुए सटीक मिसाइल हमले किए। सूत्रों के अनुसार, इन हमलों में 100 से अधिक आतंकी मारे गए।
भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी मिसाइल हमले शुरू कर दिए। दोनों देशों के बीच ये टकराव लगातार तीन दिन तक चला, जिससे पूरे दक्षिण एशिया में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। वैश्विक समुदाय भी इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित था।
तनाव के बीच जब भारत और पाकिस्तान के बीच अचानक सीजफायर की घोषणा हुई, तो उसी दिन डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर यह कहा कि “हमने यह सीजफायर कराया है”। उनके इस दावे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं, लेकिन ट्रंप ने कई मंचों पर इस बात को दोहराया।
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के समाधान का श्रेय खुद को दिया हो। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भी वह कई बार मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं, हालांकि भारत हमेशा से कहता रहा है कि यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की आवश्यकता नहीं है।
अब तक भारत सरकार की ओर से ट्रंप के इस ताजा बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारत ने हमेशा ऐसे मामलों में संयम और राजनयिक मर्यादा बनाए रखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान अमेरिका में चुनावी राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। वे अक्सर ‘डील मेकर’ के रूप में खुद की छवि बनाकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में दखल देने की कोशिश करते हैं। हालांकि इस तरह के दावे भविष्य की राजनयिक जटिलताओं को जन्म दे सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान एक बार फिर चर्चा में है। भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मसले पर सार्वजनिक रूप से परमाणु युद्ध की संभावना और खुद को नायक घोषित करना, राजनयिक दृष्टिकोण से एक गंभीर मामला है। देखना होगा कि इस बयान पर भारत, पाकिस्तान और वैश्विक समुदाय किस प्रकार की प्रतिक्रिया देता है।
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