Operation Cuba 2026
Operation Cuba 2026: वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की घेराबंदी करने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अपना पूरा ध्यान क्यूबा की ओर मोड़ दिया है। वाशिंगटन के गलियारों में चर्चा तेज है कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा की दशकों पुरानी कम्युनिस्ट सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए एक आक्रामक योजना पर काम कर रहा है। ट्रंप की टीम हवाना में नेतृत्व परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) की नीति अपनाने जा रही है। इस योजना का केंद्र क्यूबा की आर्थिक रीढ़ को तोड़ना है, ताकि वहां के नेतृत्व को झुकने या सत्ता छोड़ने पर मजबूर किया जा सके।
इस संभावित कार्रवाई को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का पूरा समर्थन प्राप्त है। क्यूबा मूल के अमेरिकी नागरिक होने के नाते, रुबियो का हवाना के प्रति रुख हमेशा से बेहद कठोर रहा है। वे लंबे समय से क्यूबा की कम्युनिस्ट व्यवस्था को अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बताते रहे हैं। रुबियो का मानना है कि केवल कड़े आर्थिक प्रतिबंध और पूर्ण राजनयिक अलगाव ही क्यूबा के लोगों को ‘तानाशाही’ से मुक्ति दिला सकते हैं। ट्रंप प्रशासन के भीतर उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि इस बार अमेरिका केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगा।
अमेरिकी प्रशासन की सबसे विनाशकारी योजना क्यूबा के तेल आयात पर पूर्ण नाकेबंदी (Oil Blockade) लगाना है। क्यूबा अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर वेनेजुएला से मिलने वाली तेल आपूर्ति पर निर्भर है। ट्रंप टीम ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे वेनेजुएला से क्यूबा को होने वाली तेल और धन की तस्करी को पूरी तरह रोक देंगे। यदि यह नाकेबंदी लागू होती है, तो क्यूबा में बिजली उत्पादन, परिवहन और उद्योग पूरी तरह ठप हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम क्यूबा की पहले से ही जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए “मौत की सजा” जैसा साबित हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन की इस नाराजगी का एक बड़ा कारण क्यूबा का रूस और चीन के साथ बढ़ता रणनीतिक गठजोड़ है। अमेरिका अपने तटों से महज 90 मील की दूरी पर रूसी जासूसी जहाजों और चीनी निवेश की मौजूदगी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। वाशिंगटन इसे शीत युद्ध के दौर की तरह एक बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है। अमेरिका का मानना है कि क्यूबा इन वैश्विक शक्तियों को अपने क्षेत्र में जगह देकर अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिसे रोकना ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता है।
वर्तमान में क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल एक गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। देश में भोजन, दवाइयों और ईंधन की भारी किल्लत है। अमेरिकी सख्ती के कारण वहां की जनता में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका लाभ ट्रंप प्रशासन उठाना चाहता है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि पूर्ण नाकेबंदी से क्यूबा में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है, जिससे लाखों मासूम प्रभावित होंगे। प्रशासन के भीतर भी इस बात पर गंभीर बहस जारी है कि क्या यह आक्रामक कदम क्यूबा में लोकतंत्र लाएगा या केवल अराजकता फैलाएगा।
संकट की इस घड़ी में क्यूबा ने मेक्सिको की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। हालांकि मेक्सिको ने कुछ मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मेक्सिको की आपूर्ति क्यूबा की विशाल मांग को पूरा करने के लिए नाकाफी है। दूसरी ओर, चीन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह क्यूबा के आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करेगा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस और चीन का समर्थन क्यूबा के लिए एक रक्षा कवच का काम कर सकता है। अब देखना यह है कि क्या ट्रंप अपनी इस कूटनीतिक और आर्थिक घेराबंदी से क्यूबा में ‘तख्तापलट’ करने में सफल हो पाते हैं या नहीं।
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