Iran-US War
Iran-US War: पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोकने का एक बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान किया है। युद्ध के 24वें दिन ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना अगले 5 दिनों तक ईरान पर कोई हमला नहीं करेगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कूटनीतिक रास्तों को एक मौका देना है। राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि युद्ध के भविष्य का फैसला अब बंद कमरों में होने वाली बातचीत के परिणामों पर निर्भर करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए दुनिया को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि पिछले दो दिनों में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता के पूर्ण समाधान को लेकर बहुत ही उत्पादक और सकारात्मक बातचीत हुई है।” ट्रंप ने आगे बताया कि इन गहन और रचनात्मक वार्ताओं के आधार पर ही उन्होंने अपने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि ईरानी पावर प्लांट्स और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ नियोजित सभी सैन्य हमलों को 5 दिनों की अवधि के लिए टाल दिया जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि यह सैन्य रोक पूरी तरह से ईरान के साथ चल रही चर्चाओं की सफलता पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि यह कूटनीतिक प्रक्रिया पूरे सप्ताह जारी रहेगी। ट्रंप के इस रुख से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका अब सीधे टकराव के बजाय एक ‘समग्र समाधान’ की तलाश में है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि यदि बातचीत किसी तार्किक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती है, तो सैन्य विकल्प दोबारा खुले रहेंगे। इस शांति पहल का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना है।
इस भीषण युद्ध की नींव 28 फरवरी को पड़ी थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ के उद्देश्य से तेहरान पर एक बड़ा और घातक हमला किया था। इस हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया क्योंकि इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और राजनेता मारे गए थे। इस घटना के बाद ईरान ने ‘प्रतिशोध’ की कसम खाई और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ चौतरफा जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिससे पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस गया।
पिछले 24 दिनों के दौरान ईरान ने न केवल इजरायल को निशाना बनाया, बल्कि पूरे मिडिल-ईस्ट में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर व्यापक हमले किए। इन हमलों का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा। दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित होने के कारण ईंधन के दाम आसमान छूने लगे। कई देशों में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस युद्ध को रोकने के लिए दबाव बनाने पर मजबूर कर दिया। संभवतः इसी आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के चलते ट्रंप ने अब शांति की राह पकड़ी है।
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