Donald Trump
Donald Trump: वाशिंगटन से एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक अपडेट सामने आया है, जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनावपूर्ण संबंधों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर मध्यस्थता करने के संकेत देते हुए पाकिस्तान के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “मैं इस संघर्ष में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार हूं, क्योंकि पाकिस्तान के साथ मेरे संबंध बहुत प्रगाढ़ हैं।” ट्रंप ने आगे कहा कि पाकिस्तान के पास वर्तमान में एक महान प्रधानमंत्री और जनरल आसिम मुनीर के रूप में एक महान सैन्य प्रमुख हैं। इन दोनों नेताओं के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए ट्रंप ने भरोसा जताया कि पाकिस्तान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के प्रति अपने सख्त तेवर बरकरार रखे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हो रही हालिया बातचीत के तौर-तरीकों से बिल्कुल भी “खुश नहीं” हैं। हालांकि, उन्होंने कूटनीति के लिए एक छोटा दरवाजा खुला रखते हुए कहा कि वे भविष्य की बातचीत के परिणामों का इंतजार करेंगे। ट्रंप का यह बयान तब आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और अमेरिका लगातार ईरान की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि वे वार्ताकारों को एक और बड़ा क्षेत्रीय युद्ध टालने के लिए कुछ और समय देना चाहते हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक सख्त चेतावनी भी जोड़ दी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान एक व्यापक और पारदर्शी परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी तरफ, ईरान लगातार यह दावा कर रहा है कि उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है, न कि परमाणु हथियार विकसित करने के लिए।
जब ट्रंप से ईरान के साथ संभावित दीर्घकालिक संघर्ष के जोखिमों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने व्यवहारिक रुख अपनाते हुए कहा कि युद्ध में हमेशा अच्छे और बुरे दोनों तरह के जोखिम शामिल होते हैं। उन्होंने ईरान को ‘सड़कछाप बमों का राजा’ और ‘आतंकवाद का नंबर-1 प्रायोजक’ करार दिया। ट्रंप ने अपनी पिछली उपलब्धियों को याद दिलाते हुए कासिम सुलेमानी को खत्म करने का जिक्र किया और कहा कि सुलेमानी रोडसाइड बमों का जनक था। उन्होंने दोहराया कि उनके प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों।
क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं की बढ़ती तैनाती और ट्रंप के कड़े बयानों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और ईरान के प्रति आक्रामक रवैया अमेरिका की नई विदेश नीति के संकेतों को स्पष्ट करता है। जहां एक ओर वे दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए पाकिस्तान को महत्वपूर्ण भागीदार मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान को नियंत्रित करने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहे हैं। आने वाले हफ़्तों में होने वाली वार्ताएं यह तय करेंगी कि दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ेगी या कूटनीति का रास्ता विजयी होगा।
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