US-Iran War
US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की शुरुआत और इसकी रणनीतियों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। टेनेसी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान ट्रंप ने उन परिस्थितियों का जिक्र किया, जिनके कारण अमेरिका को इस युद्ध में कूदना पड़ा। ट्रंप के बयानों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या यह युद्ध टाला जा सकता था या यह केवल एक पूर्व नियोजित सैन्य रणनीति का हिस्सा था। दुनिया भर की निगाहें अब व्हाइट हाउस के अगले कदम पर टिकी हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध के पक्ष में सबसे प्रखर आवाज उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की थी। ट्रंप के अनुसार, हेगसेथ का मानना था कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने का एकमात्र तरीका सैन्य कार्रवाई ही है। हेगसेथ ने तर्क दिया था कि कूटनीति के विफल होने के बाद अब सीधे प्रहार करने का समय आ गया है। पेंटागन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेगसेथ ने अपने लक्ष्यों को दोहराया और कहा कि अमेरिकी सेना का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल तकनीक, ड्रोन बेड़े और नौसैनिक शक्ति को पूरी तरह पंगु बनाना है।
‘रोलिंग स्टोन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर इस युद्ध को लेकर आम सहमति नहीं थी। जहाँ एक ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक जैसे प्रभावशाली लोग हमले के पक्ष में थे, वहीं प्रशासन के कुछ वरिष्ठ सदस्य सावधानी बरतने की सलाह दे रहे थे। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस युद्ध को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। इसी आंतरिक खींचतान के बीच नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के पूर्व प्रमुख जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे प्रशासन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
युद्ध की शुरुआत को लेकर कई थ्योरी सामने आ रही हैं। कुछ अधिकारियों का दावा है कि इजरायल पहले से ही ईरान पर बड़े हमले की तैयारी कर चुका था, जिसके कारण अमेरिका को मजबूरन अपने सहयोगी के साथ खड़ा होना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर खुफिया रिपोर्टों ने चेतावनी दी थी कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब पहुँच गया है। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि उनके पास दो ही रास्ते थे: या तो खतरे को नजरअंदाज करें या उसे जड़ से खत्म कर दें। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि ईरान की जवाबी कार्रवाई उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज और आक्रामक थी।
युद्ध के बीच ट्रंप ने कूटनीति का दरवाजा भी खुला रखा है। उन्होंने दावा किया कि उनके दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरान के एक शीर्ष नेता के संपर्क में हैं और एक समझौते की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि, ईरान सरकार ने किसी भी तरह की गुप्त बातचीत से साफ इनकार किया है। ट्रंप ने पहले ईरान को अपनी शर्तें मानने के लिए सोमवार तक का समय दिया था, लेकिन अब इस डेडलाइन को 5 दिन और बढ़ा दिया गया है। यह विस्तार संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल पूर्ण युद्ध के बजाय दबाव की राजनीति के जरिए हल निकालना चाहता है।
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