Trump Visa Policy 2026
Trump Visa Policy 2026: संयुक्त राज्य अमेरिका में साल 2025 के शुरुआती आठ महीनों के भीतर कानूनी आप्रवासन (Legal Immigration) के आंकड़ों में एक चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त वीजा नीतियों और गहन जांच प्रक्रियाओं के कारण वीजा जारी करने की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। एक प्रतिष्ठित अमेरिकी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 2.5 लाख कम वीजा जारी किए गए हैं। यह गिरावट दर्शाती है कि अमेरिका अब अपनी सीमाओं और प्रवेश नियमों को लेकर पहले से कहीं अधिक अनुशासित और कठोर रुख अपना रहा है।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) और विभिन्न श्रेणियों के अस्थायी वीजा की स्वीकृतियों में कुल मिलाकर 11 प्रतिशत की कमी आई है। इस नीतिगत बदलाव की सबसे गाज भारत और चीन के नागरिकों पर गिरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल इन दो देशों के नागरिकों को जारी किए जाने वाले वीजा में 84,000 की भारी कटौती देखी गई है। चूंकि भारत और चीन से सबसे अधिक पेशेवर और छात्र अमेरिका जाते हैं, इसलिए इस गिरावट का वैश्विक श्रम बाजार और शैक्षिक विनिमय पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है।
ट्रंप प्रशासन की सख्ती का सबसे बड़ा शिकार ‘स्टूडेंट वीजा’ श्रेणी हुई है। साल 2025 के पहले आठ महीनों में छात्र वीजा जारी करने की दर में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, जहाँ 2024 की समान अवधि में लगभग 3.44 लाख छात्र वीजा जारी किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर महज 2.38 लाख रह गई है। इसके अलावा, एक्सचेंज वीजा और शोधकर्ताओं को दिए जाने वाले परमिट में भी 30,000 की कमी आई है। यह स्थिति अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए चिंता का विषय है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों से मिलने वाली फीस पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं।
विशेषज्ञों और आव्रजन विश्लेषकों ने इस गिरावट के पीछे कई तकनीकी और नीतिगत कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें प्रमुख हैं:
सोशल मीडिया की गहन जांच: आवेदकों के डिजिटल फुटप्रिंट और सोशल मीडिया गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है।
यात्रा प्रतिबंध: लगभग 19 देशों पर लगाए गए कड़े यात्रा प्रतिबंधों ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
साक्षात्कारों पर रोक: छात्र वीजा साक्षात्कारों पर अस्थायी रोक और अपॉइंटमेंट मिलने में हो रही देरी।
संसाधनों की कमी: अमेरिकी विदेश विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण आवेदनों के निपटान में प्रतीक्षा समय (Waiting Time) ऐतिहासिक रूप से बढ़ गया है।
अमेरिकी सरकार ने अपने इस कड़े रुख का बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि ‘वीजा देना कोई अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है।’ प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना और उन लोगों की पहचान करना है जो देश के लिए खतरा हो सकते हैं। दूसरी ओर, आलोचकों और अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। कुशल कामगारों और प्रतिभाशाली छात्रों की कमी से अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (Global Competitiveness) कमजोर हो सकती है, जिससे तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में उसकी बढ़त प्रभावित होने का डर है।
2025 के अंतिम महीनों में भी इन नीतियों में ढील के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले समय में एच-1बी (H-1B) और अन्य वर्क वीजा श्रेणियों में भी और अधिक गिरावट देखी जा सकती है। भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें अब और भी कड़े मानदंडों को पूरा करना होगा।
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