Diamond Trade Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक के अतिरिक्त टैरिफ ने भारतीय हीरा उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। इसका सबसे बड़ा असर गुजरात के सूरत शहर पर पड़ा है, जिसे दुनिया का हीरा हब कहा जाता है।

क्रिसमस ऑर्डर रद्द, उत्पादन घटा
टैरिफ वॉर का सीधा असर अमेरिका से आने वाले क्रिसमस ऑर्डर्स पर पड़ा है। सूरत के कई हीरा व्यापारियों को अमेरिकी ग्राहकों से मिले ऑर्डर्स रद्द करने पड़े हैं। इससे हीरे की कटाई, पॉलिशिंग और आभूषण निर्माण का काम ठप पड़ गया है। सूरत स्थित धर्मनंदन डायमंड्स के निदेशक हितेश पटेल के मुताबिक, “हमारा उत्पादन पहले ही 30-35 प्रतिशत घट चुका है, और अब इस अतिरिक्त शुल्क के चलते स्थिति और बिगड़ेगी।” उनकी कंपनी की कुल सालाना आय लगभग ₹7,000 करोड़ है।

अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका भारत से कुल हीरे के 68 प्रतिशत आयात का स्रोत रहा। कीमत के लिहाज से, यह हिस्सा 42 प्रतिशत है। अब जबकि भारत पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया गया है और इज़राइल पर केवल 19 प्रतिशत, तो अमेरिकी खरीदार भारत से खरीदने के बजाय दूसरे विकल्पों की ओर जा सकते हैं। यही कारण है कि अमेरिका को भारत का निर्यात लगातार गिर रहा है।
छोटे व्यापारियों और मजदूरों पर सीधा असर
वल्लभभाई लखानी, किरण जेम्स के मालिक, ने बताया कि पहले जहां उनकी कंपनी अमेरिका को 70 प्रतिशत उत्पाद निर्यात करती थी, वहीं अब यह घटकर 40 प्रतिशत रह गया है। यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो यह और भी गिर सकती है। GJEPC के अध्यक्ष किरीट भंसाली का कहना है कि अगर अमेरिका का रास्ता बंद हो गया, तो गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के 1.25 लाख से अधिक श्रमिकों की नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। इसका असर न केवल इन परिवारों पर, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात उद्योग पर भी गहरा होगा।
27 अगस्त पर टिकी निगाहें
ट्रंप द्वारा लगाए गए नए टैरिफ 27 अगस्त 2025 से प्रभावी होंगे। सूरत के व्यापारी इस दिन के बाद अमेरिकी खरीदारों से बातचीत कर शुल्क साझा करने का प्रस्ताव रखेंगे। हालांकि, क्या ये बातचीत रंग लाएगी या भारत को दीर्घकालिक नुकसान झेलना पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत के हीरा उद्योग के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। सूरत जैसे शहर, जो इस उद्योग की रीढ़ हैं, वहां व्यापार ठप होने की कगार पर है। अगर समाधान नहीं निकला, तो भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को भारी नुकसान और लाखों लोगों की आजीविका पर संकट गहराना तय है।










