Trump tariff extension : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त से लागू होने वाली नई टैरिफ दरों में एक सप्ताह का बदलाव किया है। अब यह टैरिफ दरें 7 अगस्त से लागू होंगी। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को राहत मिली है, क्योंकि अमेरिका ने इन देशों के साथ व्यापारिक समझौतों को ध्यान में रखते हुए इस पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके कारण, इन देशों को करीब एक हफ्ते का अतिरिक्त समय मिल गया है।
अमेरिका के टैरिफ का असर और देशों की लिस्ट
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि अब नई टैरिफ दरें 7 अगस्त से लागू होंगी, जिससे प्रभावित देशों को कुछ और वक्त मिलेगा। अमेरिका ने कुल 70 देशों पर नए टैरिफ की घोषणा की है। इन देशों में से कुछ पर 0 से 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया है, जबकि कुछ देशों पर यह दर 41 प्रतिशत तक हो सकती है। विशेष रूप से भारत पर अमेरिका ने 25 प्रतिशत का टैरिफ लागू करने का ऐलान किया है। वहीं, पाकिस्तान पर यह दर भारत की तुलना में कम रखी गई है।
भारत को राहत मिली, नए टैरिफ लागू होने से पहले का समय
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ भारत और अन्य देशों को होगा, क्योंकि जो सामान 7 अगस्त तक लोड किया जाएगा, उस पर नई टैरिफ दर लागू नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि यदि कोई देश अपने सामान को 7 अगस्त से पहले अमेरिका भेजने में सफल हो जाता है और वह 5 अक्टूबर तक वहां पहुंच जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ का बोझ नहीं पड़ेगा। यह कदम अमेरिकी प्रशासन द्वारा व्यापारियों को समय देने और संक्रमण अवधि में आसानी से बदलाव करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नए टैरिफ के लागू होने से व्यापार पर प्रभाव
हालांकि इस एक हफ्ते की राहत से कई देशों को फायदा होगा, फिर भी नई टैरिफ दरों का लागू होना व्यापारियों और उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। अमेरिकी सरकार का यह कदम वैश्विक व्यापार में अस्थिरता का कारण बन सकता है, क्योंकि इससे सामान की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है, जो उपभोक्ताओं पर प्रभाव डाल सकती है। भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 25% टैरिफ का असर प्रमुख रूप से विनिर्माण, निर्यात और आयात पर पड़ सकता है।
आगे की रणनीति और वैश्विक व्यापार पर असर
अमेरिका द्वारा टैरिफ दरों में बदलाव से वैश्विक व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, यह समयबद्ध राहत कदम है, लेकिन भविष्य में वैश्विक व्यापार में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका को और भी रणनीतिक बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। भारत और अन्य देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वे अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर रणनीति तैयार करें।
इस बदलाव के साथ अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन को सुधारने के लिए नए तरीके खोजे जाएंगे, ताकि आने वाले समय में वैश्विक व्यापार अधिक संतुलित और निष्पक्ष हो सके।