अंतरराष्ट्रीय

World War 3 Alert: ट्रंप का स्पेन पर फूटा गुस्सा, ‘बेस’ के इस्तेमाल पर पाबंदी के बाद व्यापार बंद करने का दिया आदेश!

World War 3 Alert: ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने वैश्विक सहयोगियों को एक अत्यंत कड़ा और स्पष्ट कूटनीतिक संदेश दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकार और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिका उन देशों में अपने महंगे सैन्य ठिकाने बनाए रखने का इच्छुक नहीं है, जो संकट की घड़ी में वाशिंगटन के रणनीतिक हितों के काम नहीं आएंगे। यह बयान भविष्य की अमेरिकी विदेश नीति में एक युगांतकारी बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

“काम न आने वाले बेस का क्या फायदा?”: सीनेटर ग्राहम का तीखा प्रहार

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मौजूदा वैश्विक स्थिति पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए एक बुनियादी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका जरूरत पड़ने पर अपने ही बनाए सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्रों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो उन देशों में अरबों डॉलर खर्च करके बेस बनाए रखने का कोई तार्किक औचित्य नहीं रह जाता।

यह तीखी प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें दावा किया गया था कि स्पेन और जर्मनी जैसे प्रमुख यूरोपीय सहयोगियों ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में अपने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इन देशों को डर है कि यदि वे अपनी जमीन का उपयोग करने देते हैं, तो ईरान इसे सीधे युद्ध में शामिल होने का बहाना मानकर उन पर जवाबी हमला कर सकता है।

नाटो को ट्रंप की खरी-खोटी: ‘कागजी शेर’ और ‘कायर’ जैसे शब्दों का प्रयोग

इसी विवादित मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नाटो (NATO) देशों के प्रति अपना कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने नाटो को एक ‘कागजी शेर’ करार देते हुए उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि जब ईरान को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को खुला रखने की बात आई, तो ये देश पीछे हट गए।

ट्रंप ने सहयोगियों को ‘कायर’ तक कह डाला और चेतावनी दी कि अमेरिका इस कठिन समय में किए गए व्यवहार को लंबे समय तक याद रखेगा। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यूरोपीय देश सुरक्षा के लिए तो अमेरिका पर निर्भर रहना चाहते हैं, लेकिन जोखिम साझा करने के समय अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

अमेरिका का विशाल सैन्य नेटवर्क और मेजबान देशों की दुविधा

वर्तमान में अमेरिका के पास दुनिया भर के 80 से अधिक देशों में 750 से अधिक सैन्य ठिकाने हैं, जिनमें से 128 प्रमुख बेस अकेले 55 देशों में स्थित हैं। यूरोप में लगभग 80,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनमें से सबसे बड़ी संख्या जर्मनी में है। मध्य पूर्व में भी अमेरिका का एक सघन जाल है, जिसमें कतर का सबसे बड़ा एयरबेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय शामिल है।

ईरान इन मेजबान देशों को लगातार धमका रहा है कि यदि अमेरिकी विमानों ने उनकी जमीन से उड़ान भरी, तो उन देशों को भी युद्ध का परिणाम भुगतना होगा। इसी डर के कारण कई देश अब अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने से रोक रहे हैं।

अमेरिकी विदेश नीति में बड़े फेरबदल के संकेत

सीनेटर ग्राहम और राष्ट्रपति ट्रंप के बयान यह स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में अमेरिका अपनी सैन्य तैनाती की रणनीति में आमूल-चूल परिवर्तन कर सकता है। अमेरिका उन देशों से अपने हाथ खींच सकता है जो अमेरिकी सैन्य हितों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता नहीं दिखाते। यह कूटनीतिक दरार न केवल ईरान के हौसले बुलंद कर सकती है, बल्कि दशकों पुराने वैश्विक सैन्य गठबंधनों की नींव को भी हिला सकती है।

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Thetarget365

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