US Iran Tension : मध्य-पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने अपनी आक्रामक हरकतों को बंद नहीं किया, तो उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक आक्रामक पोस्ट लिखकर जानकारी दी कि अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार साइटों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब और अधिक संयम बरतने की स्थिति में नहीं है और यदि आवश्यक हुआ, तो ईरान के खिलाफ एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई की जाएगी जो देश के वजूद को मिटा सकती है।

युद्धविराम का उल्लंघन बना संघर्ष का मुख्य कारण
मिडिल ईस्ट में शांति बनाए रखने के लिए महज दो हफ्ते पहले हुआ समझौता अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। तनाव की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास एक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले से हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा लगातार दूसरी बार युद्धविराम समझौते (सीजफायर) को तोड़ने के जवाब में की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार को ईरान ने ‘M/V Ever Lovely’ नामक कार्गो जहाज को निशाना बनाया था, जिसके बाद अमेरिका ने शुक्रवार को पहली एयरस्ट्राइक की थी। हालांकि, अमेरिका ने ईरान को स्थिति सुधारने का मौका दिया था, लेकिन शनिवार सुबह पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘M/T Kiku’ पर ईरानी ड्रोन हमले ने आग में घी डालने का काम किया। इस टैंकर में 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

अमेरिकी एयरस्ट्राइक और ईरान के ठिकानों पर विनाश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर, अमेरिकी वायु सेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर जोरदार हमले किए। इन हवाई हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल स्टोरेज सुविधाएं, ड्रोन डिपो और तटीय रडार साइटें थीं। स्थानीय सूत्रों और ईरान के मीडिया के अनुसार, ईरान के सिरिक द्वीप और केश्म द्वीप के एक गांव में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं। सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है।
तनावपूर्ण भविष्य: क्या पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा है मध्य-पूर्व?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह रस्साकशी अब एक गंभीर सैन्य संघर्ष में तब्दील होती दिख रही है। एक तरफ जहाँ अमेरिका तेल व्यापार और समुद्री सुरक्षा के उल्लंघन का हवाला देकर सैन्य बल का प्रयोग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान की लगातार आक्रामक गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं। ट्रंप की ‘अस्तित्व खत्म करने’ वाली टिप्पणी इस संघर्ष को उस बिंदु पर ले आई है, जहाँ से वापसी बेहद कठिन नजर आती है। दुनिया भर की निगाहें अब खाड़ी क्षेत्र में होने वाली अगली सैन्य गतिविधियों और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि आने वाले दिन पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
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