US Canada Trade War
US Canada Trade War : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच तल्खी अब एक नए स्तर पर पहुँच गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि ओटावा (कनाडा) बीजिंग के साथ किसी भी प्रकार के व्यापारिक समझौते पर आगे बढ़ता है, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। ट्रंप का तर्क है कि चीन के साथ बढ़ती नजदीकियां अंततः कनाडा की संप्रभुता को खतरे में डाल देंगी। उन्होंने आशंका जताई है कि व्यापार के बहाने चीन धीरे-धीरे कनाडा की अर्थव्यवस्था और नीतियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लेगा, जो उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
एयरफोर्स वन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया जिसने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा कि चीन के प्रभाव में आने का सबसे घातक असर कनाडा की सांस्कृतिक पहचान और उनके राष्ट्रीय खेल ‘आइस हॉकी’ पर पड़ेगा। ट्रंप के अनुसार, “यदि कनाडा वह सौदा करता है जो शी जिनपिंग चाहते हैं, तो चीन वहां सबसे पहले आइस हॉकी को खत्म कर देगा।” हालांकि यह बयान सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन इसके जरिए ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि चीन का हस्तक्षेप केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह कनाडाई जीवनशैली को भी बदल देगा।
इस ताजा विवाद की जड़ें जनवरी में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चीन यात्रा में छिपी हैं। कार्नी के बीजिंग दौरे से नाराज होकर ट्रंप ने कनाडा से आने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दे दी थी। इस आर्थिक दबाव का असर भी देखने को मिला, जिसके बाद कनाडाई सरकार ने अपने रुख में थोड़ी नरमी दिखाई। कार्नी ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल चीन के साथ कोई ‘बड़ा’ रणनीतिक समझौता नहीं कर रहे हैं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में पैदा हुई तकनीकी बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से वाशिंगटन और ओटावा के बीच दूरियां लगातार बढ़ी हैं। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों पर कनाडा का उपहास उड़ाते रहे हैं। इससे पहले वे पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित कर चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि वे कनाडा को एक स्वतंत्र देश के बजाय अमेरिका का एक हिस्सा या ’51वां राज्य’ मात्र समझते हैं। वर्तमान में, कनाडा और ब्रिटेन जैसे नाटो (NATO) सहयोगी देश अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करने के लिए चीन की ओर देख रहे हैं, जो ट्रंप की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह है।
एक तरफ जहाँ ट्रंप कनाडा और चीन की दोस्ती को लेकर बेहद तल्ख हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के प्रति उनके रुख में आश्चर्यजनक बदलाव देखा जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि तेहरान लगातार अमेरिकी सरकार के संपर्क में है और वहां बातचीत की संभावनाएं बन रही हैं। यह विरोधाभास वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है कि ट्रंप अपने पड़ोसियों के मुकाबले अपने पुराने दुश्मनों के प्रति अधिक लचीले हो रहे हैं। फिलहाल, उन्होंने साफ कर दिया है कि कनाडा ने यदि चीन के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाईं, तो उसे गंभीर आर्थिक परिणामों के लिए तैयार रहना होगा।
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