India US Relations : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं। इस बीच जर्मनी के प्रतिष्ठित अखबार FAZ ने दावा किया है कि टैरिफ विवाद के बीच ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चार बार फोन किया, लेकिन पीएम मोदी ने उनसे बात करने से साफ इनकार कर दिया।
FAZ के अनुसार, ट्रंप ने भारत को “डेड इकोनॉमी” कहने वाली विवादित टिप्पणी के बाद पीएम मोदी को मनाने के लिए कई बार कॉल की। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले 25 वर्षों से चले आ रहे घनिष्ठ संबंधों में यह सबसे बड़ा तनाव देखने को मिला है।
अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा भारत पर लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ ब्राजील के अलावा किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे अधिक है। इन फैसलों से भारत सरकार खासा असंतुष्ट है, यही वजह है कि पीएम मोदी ने ट्रंप की कॉल रिसीव करने से इंकार किया।
31 जुलाई को ट्रंप ने एक बयान में कहा, “मुझे परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या कर रहा है। वे दोनों अपनी अर्थव्यवस्थाओं को नीचे गिरा रहे हैं। हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है और उनके टैरिफ दुनिया में सबसे ऊंचे हैं।” इस टिप्पणी ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास बढ़ा दी।
FAZ ने बताया कि इस बयान से पीएम मोदी बेहद नाराज हैं और वे ट्रंप की इस टिप्पणी को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इस विवाद ने भारत की विदेश नीति को भी सतर्क कर दिया है, और वह बहुत सोच-समझकर हर कदम उठा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप भारत को अमेरिकी कृषि व्यवसाय के लिए बाजार खोलने का दबाव भी डाल रहे थे। लेकिन भारत ने इस दबाव का विरोध किया है। भारत अपनी घरेलू कृषि और व्यापार हितों की रक्षा के लिए सख्त रुख अपनाए हुए है।
अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का नया सिस्टम 27 अगस्त 2025 की आधी रात 12:01 बजे से लागू करने का नोटिस जारी किया है। इस टैरिफ के कारण भारत में अमेरिकी वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे भारत-अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर और प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रंप की भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा और विवादित बयान ने भारत-अमेरिका के लंबे समय से मजबूत रहे रिश्तों में दरार पैदा कर दी है। पीएम मोदी का ट्रंप की कॉल न लेना इस बात का संकेत है कि भारत इस विवाद में अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रख रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इस तनाव को कैसे कम किया जाएगा, यह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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