राजनीति

TVK Chief Vijay : तमिलनाडु की सियासत में नया मोड़, लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने के पीछे क्या है वजह?

TVK Chief Vijay :  तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर से श्रीलंका के तमिलों और लिट्टे (LTTE) का मुद्दा गरमा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के संस्थापक वेलुपिल्लई प्रभाकरन की बरसी के मौके पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस खास मौके पर विजय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद संवेदनशील पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, ‘हम मुल्लीवईक्कल की उन दर्दनाक यादों को हमेशा अपने दिलों में संजोकर रखेंगे! इसके साथ ही, हम समुद्र पार दुनिया के अलग-अलग कोनों में रहने वाले अपने सभी तमिल भाई-बहनों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा पूरी एकजुटता और मजबूती के साथ खड़े रहेंगे।’ उनके इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है।

भारत में एलटीटीई पर प्रतिबंध

टीवीके प्रमुख विजय ने सोमवार (18 मई) को ‘मुल्लीवईक्कल स्मृति दिवस’ के इस भावुक अवसर पर दुनिया भर में रह रहे तमिल प्रवासियों के साथ गहरी एकजुटता जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार विदेशों में बसे तमिलों के मानवाधिकारों और उनके कानूनी अधिकारों के लिए अपना नैतिक व राजनीतिक समर्थन हमेशा जारी रखेगी। हालांकि, भारत के संदर्भ में इस संगठन का इतिहास बेहद विवादित रहा है। गौरतलब है कि साल 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक आत्मघाती हमले में हुई जघन्य हत्या में शामिल होने के कारण भारत सरकार ने एलटीटीई (LTTE) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। इस ऐतिहासिक और हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में लिट्टे प्रमुख वी प्रभाकरन को मुख्य साजिशकर्ता और मुख्य आरोपी बनाया गया था, जिसके बाद से यह संगठन भारत में एक प्रतिबंधित आतंकवादी समूह के रूप में दर्ज है।

सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक संदेश

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए टीवीके प्रमुख ने लिखा, ‘आइए हम सब मिलकर मुल्लीवईक्कल की उन यादों को अपने दिलों में जिंदा रखें। हम विदेशों और पड़ोसी देशों में रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के हक की लड़ाई के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।’ आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया भर में फैले श्रीलंकाई तमिल हर साल 18 मई की तारीख को ‘मुल्लीवईक्कल स्मृति दिवस’ के रूप में बेहद गमगीन माहौल में मनाते हैं। यह दिन उनके लिए अपने उन पूर्वजों और परिजनों को याद करने का दिन है जिन्होंने श्रीलंका के गृहयुद्ध में अपनी जान गंवाई थी।

मुल्लीवईक्कल का ऐतिहासिक महत्व

श्रीलंका के मुल्लीथिवु जिले में स्थित एक छोटा सा तटीय गांव ‘मुल्लीवईक्कल’ इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है। इसी स्थान पर लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के प्रमुख वी प्रभाकरन की मौत के बाद, 18 मई 2009 को लगभग तीन दशकों से चला आ रहा खूनी श्रीलंकाई गृहयुद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त हुआ था। संयुक्त राष्ट्र (UN) की कई रिपोर्टों और अनुमानों के अनुसार, इस विनाशकारी युद्ध के अंतिम और सबसे भीषण चरणों में लगभग 40,000 से 70,000 आम तमिल नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। यही कारण है कि मुल्लीवईक्कल का यह क्षेत्र आज वैश्विक स्तर पर युद्धकालीन अत्याचारों, मानवाधिकारों के हनन और निर्दोष नागरिकों की असीम पीड़ा का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है।

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव

आमतौर पर देखा गया है कि तमिलनाडु की मुख्यधारा की सत्ताधारी पार्टियां (जैसे द्रमुक या अन्नाद्रमुक) राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा संधियों के मद्देनजर लिट्टे या प्रभाकरन के समर्थन में खुलकर सामने आने से हमेशा बचती रही हैं। वे श्रीलंकाई तमिलों की सहानुभूति तो बटोरती हैं, लेकिन प्रतिबंधित संगठन के प्रति सीधे झुकाव से परहेज करती हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री विजय की अल्पमत सरकार ने इस स्थापित राजनीतिक ढर्रे को तोड़ते हुए एक बिल्कुल अलग और स्पष्ट रूप से एलटीटीई-समर्थक रुख अपनाया है। विजय का यह आक्रामक और खुला स्टैंड आने वाले समय में तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया मोड़ ला सकता है।

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