Twisha Sharma Case
Twisha Sharma Death Case : भोपाल के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में कानूनी लड़ाई अब एक बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुई सुनवाई शाम 3:30 बजे तक चली। इस एक घंटे की मैराथन सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में चार अलग-अलग संवेदनशील याचिकाओं पर सघन बहस हुई, जिसमें मुख्य रूप से मृतका के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत, शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग और सास गिरिबाला सिंह की जमानत निरस्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे। इस न्यायिक घटनाक्रम ने पूरे प्रदेश का ध्यान इस हाई-प्रोफाइल केस की ओर खींच लिया है।
गौरतलब है कि अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत बीते 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनके ससुराल में रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई थी। शुरुआती तौर पर ससुराल पक्ष द्वारा इसे एक सामान्य आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन ट्विशा के मायके वालों ने पहले ही दिन से इस थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने पुलिस और प्रशासन के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत सामान्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश है। पिता ने न्याय के लिए मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की थी।
स्थानीय पुलिस द्वारा कराए गए शुरुआती पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से ट्विशा शर्मा का परिवार बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं था। परिजनों का तर्क था कि पहली रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले शारीरिक तथ्यों को पूरी तरह से छिपाने का प्रयास किया गया है, जिसके कारण मौत की असली वजह सामने नहीं आ सकी। इसी विसंगति को दूर करने के लिए पिता की ओर से हाईकोर्ट में एक रिट पिटीशन दायर कर दोबारा पोस्टमार्टम कराने की गुहार लगाई गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि हालांकि सरकार को डॉक्टरों की पहली टीम पर पूरा भरोसा है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए वे परिजनों की मांग का विरोध भी नहीं कर रहे हैं, जिसके बाद कोर्ट ने ‘सेकंड पोस्टमार्टम’ की मंजूरी दे दी।
इस मामले में मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि ट्विशा के ससुराल पक्ष में एक सेवानिवृत्त जिला जज शामिल हैं, जिनके रसूख और सामाजिक प्रभाव के कारण स्थानीय स्तर पर साक्ष्यों को मिटाने और चल रही पुलिस जांच को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की जा सकती है। परिजनों के इसी डर और मांग को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की आधिकारिक सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है, ताकि सच पूरी तरह सामने आ सके।
इसके साथ ही, ट्विशा की सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला न्यायालय से पहले ही मिल चुकी अग्रिम जमानत को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गईं। इनमें से एक याचिका पीड़ित पिता की ओर से और दूसरी स्वयं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दायर की गई थी। सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी महिला की जमानत तुरंत निरस्त की जानी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई आगामी 25 मई को दोपहर 2:30 बजे तय की है।
सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा उलटफेर ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर देखने को मिला। समर्थ के अधिवक्ता जयदीप कौरव ने अचानक कोर्ट को सूचित किया कि उनका मुवक्किल अपनी अग्रिम जमानत की अर्जी वापस लेना चाहता है क्योंकि वह अब कानून से भागने के बजाय आत्मसमर्पण करना चाहता है। कोर्ट की अनुमति के बाद समर्थ सिंह ने शुक्रवार शाम को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। वह घटना के बाद से ही लगातार फरार चल रहा था। अब देखना होगा कि 25 मई की सुनवाई और दिल्ली एम्स की टीम द्वारा किए जाने वाले दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इस केस को किस दिशा में ले जाती है।
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