Twisha Sharma Death Mystery
Twisha Sharma Death Mystery : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुए चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में न्याय की मांग को लेकर हंगामा लगातार जारी है। इस संवेदनशील मामले में अब एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। ट्विशा के मायके पक्ष ने उसके ससुराल वालों पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का दावा है कि ट्विशा की रहस्यमयी मौत के ठीक अगले दिन, उसकी सास गिरिबाला सिंह ने बेहद सक्रियता दिखाते हुए कई प्रभावशाली लोगों को फोन कॉल्स किए थे। परिवार का आरोप है कि इन कॉल्स के जरिए मामले को दबाने या प्रभावित करने की कोशिश की गई है, जिससे पूरी घटना पर संदेह की सुई ससुराल पक्ष की ओर घूम गई है।
ट्विशा के परिवार ने मामले को लेकर कई संदिग्ध फोन नंबरों की एक सूची सार्वजनिक की है। परिवार का सीधा दावा है कि ट्विशा की मौत के अगले दिन यानी 13 मई को उसकी सास गिरिबाला सिंह ने करीब 46 रसूखदार और प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधा था। आरोप है कि इन नंबरों में से कुछ नंबर न्यायपालिका (ज्यूडिशरी) से जुड़े बेहद उच्च पदों पर बैठे लोगों, जैसे जज और जस्टिस स्तर के व्यक्तियों के हैं। इसके अलावा कई कॉल्स उनके करीबी रिश्तेदारों और अन्य रसूखदार परिचितों को भी किए गए थे। परिवार ने यह भी चौंकाने वाला खुलासा किया है कि उसी दिन (13 मई को) घर में सीसीटीवी फुटेज इंस्टॉल करने वाले युवकों को भी गिरिबाला के नंबर से फोन किया गया था, जो सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका को बढ़ाता है।
इस मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ट्विशा के परिवार ने प्रशासन से सभी संदिग्ध नंबरों की गहनता से तकनीकी जांच करने की पुरजोर मांग की है। परिवार ने निवेदन किया है कि इन सभी नंबरों से संबंधित कॉल डिटेल रिकॉर्ड (), टॉवर डंप, टॉवर लोकेशन डेटा, इंटरनेट प्रोटोकॉल () लॉग्स, इंटरनेट उपयोग विवरण, ई-मेल, एसएमएस रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट्स व बैकअप, सोशल मीडिया संचार, क्लाउड डेटा और डिजिटल मेटाडाटा को तत्काल जब्त किया जाए। इसके साथ ही डिवाइस एक्सेस लॉग्स, लोकेशन हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्डिंग, डेटा ट्रांसफर हिस्ट्री और सर्वर लॉग्स जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का तत्काल संरक्षण, सुरक्षित अभिरक्षा और फोरेंसिक मिरर इमेजिंग कर विधिसम्मत सीलिंग सुनिश्चित की जाए।
पीड़ित पक्ष ने अपनी शिकायत में यह भी मांग की है कि उक्त मोबाइल नंबरों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े सभी संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए। इनमें आरोपी पक्ष के निकट सहयोगी, विधिक प्रतिनिधि (वकील), निजी सहायक (PA), वाहन चालक, घरेलू कर्मचारी, निवास पर कार्यरत स्टाफ और मृतका के पार्थिव शरीर के परिवहन या प्रबंधन में शामिल लोग शामिल हैं। परिवार का कहना है कि घटना के पहले और बाद में सक्रिय रहे इन सभी लोगों के संचार अभिलेखों और लोकेशन डेटा को सुरक्षित किया जाए, ताकि जांच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य को डिलीट करने, रिकॉर्ड बदलने, साक्ष्य नष्ट करने या तथ्यों को प्रभावित करने की किसी भी संभावना को पूरी तरह रोका जा सके और पारदर्शी वैज्ञानिक जांच हो सके।
एक तरफ जहां ट्विशा शर्मा का परिवार अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहा है और डिजिटल सबूतों को बचाने की जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने कानूनी राहत पाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, आरोपी समर्थ सिंह ने इस मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने या जेल से बाहर आने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समर्थ सिंह की ओर से जबलपुर हाई कोर्ट में एक जमानत अर्जी (Bail Application) दायर की गई है, जिस पर आने वाले दिनों में अदालत में सुनवाई होनी है।
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