Hormuz Crisis
Hormuz Crisis: खाड़ी क्षेत्र में सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को लेकर तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी ‘अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी’ (ADNOC) के प्रमुख सुल्तान अल-जाबेर ने ईरान के नियंत्रणकारी रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने वैश्विक व्यापारिक मार्ग को बाधित करने की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया। यूएई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग को किसी भी देश द्वारा राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह विश्व की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
सीईओ सुल्तान अल-जाबेर ने एक ऑनलाइन संबोधन में चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि तेल से लदे लगभग 230 विशाल टैंकर वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने के इंतजार में खड़े हैं। इस मार्ग पर ईरान के बढ़ते सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण के कारण जहाजों की आवाजाही ठप पड़ गई है। अल-जाबेर ने चिंता जताई कि यदि इन जहाजों को जल्द ही रास्ता नहीं मिला, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों में ईंधन का संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा करार दिया।
अल-जाबेर ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से जहाजों को गुजरने की बिना शर्त आजादी होनी चाहिए। उन्होंने ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी देश के पास यह तय करने का वैध अधिकार नहीं है कि कौन सा जहाज वहां से गुजरेगा और किन शर्तों पर। अल-जाबेर के अनुसार, ईरान वर्तमान में ‘नेविगेशन की आजादी’ के नाम पर राजनीतिक दबाव और जबरदस्ती की रणनीति अपना रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से मांग की कि इस गलियारे को किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए ताकि वैश्विक व्यापार सुचारू रूप से चल सके।
विवाद का एक मुख्य कारण ईरान का वह संकेत है जिसमें उसने महत्वपूर्ण खाड़ी जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क (टोल) लेने की बात कही है। इस पर यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। यूरोपीय संघ ने दो टूक कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बिना किसी भुगतान, वसूली या टोल के सुनिश्चित होनी चाहिए। यूरोपीय संघ का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत किसी भी संकरे जलमार्ग (Strait) से पारगमन का अधिकार सार्वभौमिक है और इसे किसी वित्तीय लाभ के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता अनवर अल अनुनी ने इस मुद्दे पर कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून स्पष्ट रूप से नौवहन की स्वतंत्रता का प्रावधान करते हैं। इसका मूल अर्थ यह है कि जहाजों को बिना किसी टोल या टैक्स के शांतिपूर्ण पारगमन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि नौवहन की स्वतंत्रता एक ‘सार्वजनिक हित’ (Public Interest) का विषय है और इसे वैश्विक शांति व व्यापारिक स्थिरता के लिए सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। ईयू ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार का एकतरफा शुल्क वसूलना वैश्विक संधियों का उल्लंघन माना जाएगा।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरान, यूएई और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता यह वाकयुद्ध अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्ग पर नियंत्रण की एक बड़ी जंग बन चुका है। जहां ईरान इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़कर देख रहा है, वहीं वैश्विक शक्तियां इसे व्यापारिक स्वतंत्रता के हनन के रूप में देख रही हैं। आने वाले दिनों में यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो 230 जहाजों का यह जाम विश्व के बाजारों में महंगाई की एक नई लहर पैदा कर सकता है।
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