Middle East War
Middle East War : मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अब तक शांति की अपील करने वाला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका और इजरायल के बाद UAE ने भी ईरान पर सैन्य हमले करने और इस जंग में अमेरिका का खुलकर साथ देने का मन बना लिया है। यह बदलाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण बदल देगा, बल्कि ईरान के लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा संकट भी पैदा कर देगा। खाड़ी देशों में UAE का यह कड़ा रुख इस बात का संकेत है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।
UAE ने इस जंग में शामिल होने के साथ-साथ एक बेहद गंभीर मांग दुनिया के सामने रखी है। अबू धाबी का कहना है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का नियंत्रण पूरी तरह बदल देना चाहिए। UAE के अनुसार, इस स्ट्रेट के महत्वपूर्ण द्वीपों, विशेषकर ‘अबू मूसा’ पर ईरान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जबकि ऐतिहासिक और कानूनी रूप से इन पर UAE का अधिकार है। अमीरात ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह इन द्वीपों को ईरान के कब्जे से मुक्त कराने में मदद करे, ताकि इस वैश्विक व्यापार मार्ग को एक देश की दादागिरी से आजाद कराया जा सके।
अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बड़ा प्रस्ताव पेश करने जा रहा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य कार्रवाई करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त करना है। UAE चाहता है कि अमेरिका, यूरोपीय देशों और प्रमुख एशियाई शक्तियों के साथ मिलकर एक संयुक्त गठबंधन बनाया जाए, जो सैन्य बल के जरिए इस समुद्री मार्ग को ईरान के प्रभाव से मुक्त कराए। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो यह आधुनिक इतिहास में ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सैन्य घेराबंदी होगी।
यदि संयुक्त अरब अमीरात इस युद्ध में सीधे तौर पर अपनी सेनाएं उतारता है, तो वह ईरान के खिलाफ औपचारिक रूप से जंग लड़ने वाला पहला अरब राष्ट्र बन जाएगा। अब तक UAE और अन्य खाड़ी देश कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ईरान की बढ़ती आक्रामकता ने उन्हें अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि, UNSC में इस प्रस्ताव को रूस और चीन के ‘वीटो’ का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन UAE ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंजूरी के बिना भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को हर तरह का सैन्य सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
UAE के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक शिपिंग बिना किसी डर और बाधा के जारी रहनी चाहिए। अमीरात का आरोप है कि ईरान अक्सर अलग-अलग बहानों से इस मार्ग को बाधित करता रहता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ता है। अब UAE एक ऐसी व्यवस्था चाहता है जहां शिपिंग पूरी तरह ‘स्वतंत्र’ हो और किसी भी देश का इस पर एकाधिकार न रहे। इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने और सैन्य शक्ति का उपयोग करने को तैयार हैं।
UAE का यह हृदय परिवर्तन वैश्विक विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय बन गया है। कुछ समय पहले तक ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अबू धाबी की यात्रा कर रहे थे ताकि युद्ध को टाला जा सके, लेकिन अचानक UAE ने अमेरिका का दामन थाम लिया है। सऊदी अरब और अन्य पड़ोसी देश भी ईरान को लेकर सख्त हो रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी ने भी सीधे युद्ध में कूदने का साहसिक ऐलान नहीं किया है। UAE का यह कदम पूरे मिडिल ईस्ट को एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर ले जा सकता है, जहाँ से वापसी का रास्ता बेहद कठिन होगा।
Read More: Maritime Crisis 2026: मिडिल ईस्ट की जंग में फंसे 20,000 नाविक, 3,000 जहाजों पर मंडराया तबाही का साया
Qin Shi Huang Tomb : चीन की धरती के नीचे एक ऐसा विशाल और भव्य…
Singapore Open 2026 : सिंगापुर ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के पुरुष डबल्स इवेंट से…
Abhishek Banerjee Attack : पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव…
Delhi Building Collapse : राजधानी दिल्ली के साकेत इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर…
Korba News : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ी प्रशासनिक…
China Nuclear Expansion : चीन अपने परमाणु हथियारों की सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत…
This website uses cookies.