अंतरराष्ट्रीय

यूक्रेन ने भी किम जोंग-उन के हथियार की ताकत को स्वीकारा

@TheTarget365 : तानाशाह किम जोंग-उन के देश उत्तर कोरिया की शक्तिशाली मिसाइल KN-23 अब एशियाई भूगोल तक ही सीमित नहीं रह गई है। यूक्रेन में चल रहे युद्ध में इस मिसाइल का प्रभाव इतना स्पष्ट हुआ है कि अब यूक्रेनी अधिकारी भी इसकी सटीकता को स्वीकार करने लगे हैं। दरअसल, रूस ने हाल ही में यूक्रेन के खिलाफ एक और बड़ा हमला किया है।

इस हमले में 300 से अधिक ड्रोन और 7 मिसाइलें दागी गईं। यूक्रेनी वायु सेना और अन्य एजेंसियों का कहना है कि इनमें से कुछ मिसाइलें उत्तर कोरिया में बनी हैं। कीव और ओडेसा जैसे महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बनाया गया, जहां तीन लोगों की जान चली गयी।यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को दावा किया कि रूस ने उत्तर कोरिया की KN-23 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इनमें से दो मिसाइलों को कीव में मार गिराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया ने इन मिसाइलों की रेंज और सटीकता में काफी सुधार किया है।

उन्होंने इसे वैश्विक समुदाय के लिए चेतावनी बताया और विश्व से प्योंगयांग और मास्को के बीच इस सैन्य सहयोग को रोकने की अपील की। यूक्रेन के रक्षा खुफिया प्रमुख किरिलो बुडानोव ने भी मिसाइलों को प्रत्यक्ष सैन्य खतरा बताया। सोमवार को प्रकाशित एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि पहले ये मिसाइलें अपने लक्ष्य से कई किलोमीटर दूर गिरती थीं, लेकिन अब वे लक्ष्य पर सटीकता से वार कर रही हैं।

केएन-23 मिसाइल: यह खतरनाक क्यों है?
केएन-23 एक उत्तर कोरियाई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका पहली बार मई 2019 में परीक्षण किया गया था। इसकी सीमा 690 किलोमीटर तक मानी जाती है और यह अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ पर उड़ती है, जिससे इसे रोकना मुश्किल होता है। इस मिसाइल का डिज़ाइन रूसी इस्कंदर-एम मिसाइल के समान है।कई विश्लेषकों का मानना ​​है कि उत्तर कोरिया को इसे तैयार करने के लिए विदेशी तकनीक या सहायता प्राप्त हुई होगी। लंबाई 7.5 मीटर, कुल वजन 3415 किलोग्राम और वारहेड क्षमता 500 किलोग्राम (रेंज 450 किमी) तथा हल्के वारहेड के साथ इसकी रेंज 690 किमी है।

चिंता क्यों बढ़ गई?
अब तक उत्तर कोरियाई मिसाइलों का प्रयोग केवल परीक्षण के लिए किया जाता था, लेकिन यूक्रेन में उनका प्रयोग वास्तविक युद्ध में किया जा रहा है। एक ओर मिसाइलों का परीक्षण हो रहा है, तो दूसरी ओर उनकी क्षमताओं में भी लगातार सुधार हो रहा है। यही कारण है कि यूक्रेन और कई अन्य देश इस मुद्दे से चिंतित हो गए हैं।

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