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यूक्रेन ने 4 रूसी हवाई ठिकानों और एक परमाणु नौसैनिक अड्डे पर किया हमला

@Thetarget365 : यूक्रेन ने 4 रूसी हवाई ठिकानों और एक परमाणु नौसैनिक अड्डे पर हमला किया है। रूस को अब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ऑपरेशन 31 मई की रात को शुरू हुआ था। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों ने एक साथ कई मोर्चों पर बड़े हमले की योजना बनाई थी और 1 जून को उनका सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल हो गया। 31 मई की शाम से यूक्रेन ने 4 रणनीति के तहत रूस पर हमला शुरू कर दिया। इसके लिए ड्रोन, वायुसेना, तोपखाने और एजेंटों का इस्तेमाल किया गया।

22-23 मई को रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा आक्रमण किया। खार्किव से लेकर पोलिश सीमा तक यूक्रेनी धरती रूसी बारूद के प्रभाव से हिल गई थी, लेकिन अब यूक्रेन ने रूस के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए अपने सभी विकल्प समाप्त कर दिए हैं, और 13 रूसी प्रांतों में विनाशकारी दृश्य दिखाई दे रहा है।

हमले में किस तरह की रणनीति अपनाई गई?
यूक्रेन ने कई रूसी शहरों पर ड्रोन हमले किए हैं, जिससे आवासीय क्षेत्रों में तबाही मची है। यूक्रेनी अग्रिम मोर्चे पर हमले में कई रूसी सुरक्षा और मजबूत किलेबंदी नष्ट हो गई है। इसी समय, रूसी खुफिया एजेंसियों ने तोड़फोड़पूर्ण हमले किये और रूसी बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया। विस्फोट के कारण पुल ध्वस्त हो गया, जिससे एक यात्री रेलगाड़ी भी प्रभावित हुई। यूक्रेन ने इससे पहले रूस पर इतना विनाशकारी हमला कभी नहीं किया है। इन हमलों के लिए चार प्रकार की रणनीति का इस्तेमाल किया गया।

यूक्रेनी ड्रोन ब्रिगेड ने अग्रिम मोर्चे और रूसी शहरों पर हमले किए हैं। यूक्रेनी वायु सेना ने रूस की सीमा से लगे शहरों पर बमबारी की है। यूक्रेनी तोपखाने ने एक बार फिर कुर्स्क पर हमला किया है। इसके साथ ही यूक्रेनी एजेंटों ने रूस में दो पुलों को नष्ट कर दिया। यह यूक्रेन के सवेत्ता पर हुए हमले की तस्वीर है। एक ट्रक पुल के ऊपर से गुजर रहा है और एक रेलगाड़ी पुल के नीचे से गुजर रही है। तभी पुल की स्लैबें ट्रेन पर गिर गईं। रूस ने इस हमले को यूक्रेनी खुफिया एजेंसी जीयूआर का काम बताया।

ब्रायंस्क में यह पुल 31 मई और 1 जून की रात को ढह गया था। रूस ने मामले के आतंकवादी पहलू की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना स्थल पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है। दूसरा हमला यूक्रेन द्वारा कुर्स्क में किया गया। कुर्स्क में एक पुल पर आईईडी लगाया गया था और उसे उड़ा दिया गया। इसके स्लैब नीचे से गुजर रही एक ट्रेन पर भी गिरे। कुर्स्क में तीन रेलगाड़ियाँ पटरी से उतर गईं। ब्रायंस्क ब्रिज विस्फोट में जहां लोको पायलट यानी ट्रेन चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, वहीं रूस को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।

यूक्रेन ने रूस के आरोपों से इनकार किया
रूस का दावा है कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियां ​​लंबे समय से अपने एजेंटों के माध्यम से राजमार्ग पुल को ध्वस्त करने की योजना बना रही थीं। यूक्रेन ने एक ट्रक में विस्फोटक भरकर ब्रायंस्क पुल को नष्ट कर दिया। एक रेलगाड़ी पर पुल गिरने से सात यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई तथा इस घटना में 50 लोग घायल बताए गए। यह रूसी रेलगाड़ी ब्रायंस्क से मास्को जा रही थी। रूस ने इस घटना के लिए यूक्रेनी खुफिया एजेंसी जीयूआर को जिम्मेदार ठहराया है। हालाँकि, यूक्रेन ने रूस के आरोपों का खंडन किया है।

इसके अलावा, ऐसी खबरें हैं कि ज़ापोरिज़िया क्षेत्र में एक रूसी सैन्य ट्रेन को भी यूक्रेनी ड्रोन ब्रिगेड ने निशाना बनाया था। पिछले कुछ महीनों में रूस में कई पुल ढह गए हैं और कहा जा रहा है कि इसके पीछे यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों का हाथ है। ब्रायंस्क से पहले स्मोलेंस्क पुल अप्रैल 2024 में ढह गया था। उससे पहले अक्टूबर 2023 में बारियातिया पुल पर विस्फोट हुआ था। जुलाई 2022 में ज़बाइकल्स्की क्राय में पुल ढह गया।

ये वे प्रमुख पुल हैं जो युद्ध के दौरान यूक्रेन में विस्फोटों के कारण ढह गए थे। पुल पर हमले के अलावा, यूक्रेन ने अग्रिम मोर्चे से कई शहरों पर तीव्र हमले शुरू कर दिए हैं। यूक्रेन की सीमा पर Su-27 से GBU-62 बम गिराए गए। इससे रूसी सैन्य चौकी नष्ट हो गयी। अग्रिम मोर्चे पर एमआई-24 हेलीकॉप्टरों से हाइड्रा रॉकेट हमले किए गए। अग्रिम मोर्चे पर यूक्रेनी हमले में रूसी टोर-एम2 रक्षा प्रणाली नष्ट हो गई। इसके अलावा, ज़ापोरिज़िया में यूक्रेनी आक्रमण में कई रूसी डी-30 हॉवित्जर तोपें नष्ट कर दी गईं।

रूसी शहर कुर्स्क में एक रूसी सैन्य अड्डा यूक्रेनी हवाई हमले में नष्ट हो गया है। स्मोलेंस्क में यूक्रेनी ड्रोन हमले में रूसी पैंटिर रक्षा प्रणाली नष्ट हो गई। बेलगोरोद में यूक्रेनी हमले में रूसी बख्तरबंद वाहन नष्ट हो गए। यूक्रेनी एजेंटों ने रूस के कई इलाकों में आग भी लगाई है। मॉस्को के एक गोदाम से निकलता यह धुआँ यूक्रेनी एजेंटों द्वारा की गई आगजनी का परिणाम है।

ज्ञातव्य है कि यूक्रेन ने यह हमला नाटो की मदद से किया था। नाटो के यूरोपीय देश यूक्रेन को लक्षित खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही नाटो ने यूक्रेन को अपनी विशेष प्रणाली सीएसआई की सेवाएं भी देनी शुरू कर दी हैं, जिससे यूक्रेन पर हमले और अधिक सटीक हो रहे हैं। सीएसआई एक ऐसी प्रणाली है जो सभी कमांड और नियंत्रण केंद्रों का समन्वय करती है।

इसका कोडनाम नाटो वाई-फाई है। यह हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर के माध्यम से रणनीतिक सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है। इसका काम सैन्य विमानों और रक्षा प्रणालियों का समन्वय करना है। इसके माध्यम से सेना की सभी सामरिक कमांडों के साथ संचार कायम रखा जाता है। यह प्रणाली दुश्मन के लक्ष्यों के बारे में वास्तविक समय पर डेटा सूचना भेजती रहती है। नाटो वाई-फाई के जरिए मैदान, कमांड सेंटर और हवा में उड़ते विमान के बीच बराबर संपर्क बना रहता है, यानी मैदान में खड़े सैनिक और विमान के बीच संवाद बना रहता है।

यूरोपीय देशों ने स्वीकार कर लिया है कि अब उन्हें अमेरिका के बिना ही यूक्रेन की मदद करनी होगी। अमेरिका का रुख स्पष्ट है कि वह यूक्रेन पर अपना डॉलर बर्बाद नहीं करेगा। अमेरिका का रुख देखकर ब्रिटेन-फ्रांस ने प्लान बी को सक्रिय कर दिया है। यूरोप का गठबंधन समूह अब लंबे समय तक यूक्रेन को हथियार आपूर्ति करने की व्यवस्था कर रहा है। अमेरिका यूक्रेन में यूरोपीय सैन्य तैनाती के खिलाफ है। अब यूरोपीय देश यूक्रेन को युद्ध जारी रखने में मदद करते रहेंगे। माना जा रहा है कि अमेरिका यूक्रेन पर युद्ध विराम के लिए दबाव डाल सकता है और इस दबाव को कम करने के लिए यूरोप की मदद से रूस पर हमला किया जा रहा है।

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