Global Water Crisis
Global Water Crisis: संयुक्त राष्ट्र (UN) की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक जल संकट को लेकर बेहद खतरनाक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया की आधी आबादी यानी लगभग 4 अरब लोग पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। यह संकट अब केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के 100 सबसे बड़े महानगरों में से आधे शहर पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि जल प्रबंधन के तरीकों में तुरंत बदलाव नहीं किया गया, तो आने वाले समय में न्यूयॉर्क, बीजिंग और रियो डी जनेरियो जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्र भी प्यासे रह सकते हैं।
जल संकट की इस वैश्विक सूची में भारत की स्थिति चिंताजनक है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की राजधानी दिल्ली दुनिया के सबसे अधिक जल संकट वाले शहरों में चौथे स्थान पर है। इसके अलावा, कोलकाता 9वें, मुंबई 12वें, बेंगलुरु 24वें और चेन्नई 29वें पायदान पर मौजूद हैं। रिपोर्ट बताती है कि हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत और पुणे जैसे शहर भी लंबे समय से गिरते भू-जल स्तर की समस्या झेल रहे हैं। भारत के इन बड़े शहरों में जनसंख्या का दबाव और संसाधनों का अत्यधिक दोहन इस संकट को और गहरा बना रहा है।
रिपोर्ट में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को लेकर सबसे चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। काबुल दुनिया का पहला ऐसा आधुनिक शहर बन सकता है, जहां पानी पूरी तरह खत्म हो जाएगा। वहीं, मैक्सिको सिटी की स्थिति भी गंभीर है; भूमिगत जल के बेतहाशा दोहन के कारण यह शहर हर साल लगभग 20 इंच की दर से जमीन में धंस रहा है। विकसित देशों में भी स्थिति सामान्य नहीं है; अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में कोलोराडो नदी के घटते जल स्तर और उसके बंटवारे को लेकर भारी विवाद चल रहा है।
यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक जल स्रोत जैसे नदियां, झीलें और वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) तेजी से सूख रहे हैं। हर साल करीब 4 अरब लोग कम से कम एक महीने तक पानी की बूंद-बूंद को तरसते हैं। 1990 के बाद से दुनिया की आधी बड़ी झीलों का पानी कम हो गया है, जबकि भूमिगत जल भंडार में 70% तक की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 50 वर्षों में यूरोप की अधिकांश आर्द्रभूमियां खत्म हो चुकी हैं और 1970 के बाद से ग्लेशियरों का आकार करीब 30% तक घट गया है, जो भविष्य के लिए एक खतरे की घंटी है।
ईरान की राजधानी तेहरान लगातार छठे साल भीषण सूखे का सामना कर रही है और अब यह ‘डे जीरो’ (वह दिन जब नलों से पानी आना पूरी तरह बंद हो जाएगा) के बेहद करीब है। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका का केप टाउन और भारत का चेन्नई भी इस डरावनी स्थिति का सामना कर चुके हैं। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ कावेह मदानी का कहना है कि अब मानवता को ‘सीमित जल संसाधनों’ की वास्तविकता को स्वीकार कर उसी के अनुरूप जीवन शैली ढालनी होगी।
ग्लोबल वार्मिंग और अनियंत्रित शहरीकरण ने प्रकृति के जल चक्र को बिगाड़ दिया है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि हमने जल संचयन, वर्षा जल संरक्षण और रिसाइकिलिंग तकनीक को युद्ध स्तर पर नहीं अपनाया, तो सिंकहोल (जमीन में गड्ढे होना) और मरुस्थलीकरण जैसी समस्याएं आम हो जाएंगी। आने वाली पीढ़ियों को प्यास से बचाने के लिए सरकारों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा, अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब पानी के लिए वैश्विक संघर्ष शुरू हो जाएंगे।
BJP MLA Naveen Jain : ओडिशा के बोलांगीर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया…
MI vs KKR Today Match : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांच ने दस्तक…
LPG Cylinder Price 1 April : ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के…
PM Modi Palakkad : केरल में आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र…
OnePlus Nord 6: स्मार्टफोन की दुनिया में वनप्लस एक बार फिर धमाका करने के लिए…
CG Lab Attendant Recruitment 2026: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के…
This website uses cookies.