Budget 2026 India
Budget 2026 India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जल्द ही संसद में बजट 2026 पेश करने जा रही हैं। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब भारत के सामने केवल घरेलू मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। ट्रंप प्रशासन की नई व्यापार नीतियां, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का वैश्विक परिदृश्य और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव इस बजट को पिछले कई वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज बना रहे हैं।
वर्तमान में वैश्विक व्यापार के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर दिख रहा है, जहाँ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने अकेले जनवरी 2026 में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 91.97 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे आयातकों की लागत बढ़ गई है। यह बजट इन बाहरी झटकों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
इक्वेंटिस वेल्थ एडवाइजरी सर्विसेज के विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का बजट ‘रिफॉर्म’ पर केंद्रित होगा, लेकिन सरकार राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) का भी पूरा ध्यान रखेगी। उम्मीद है कि सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4% तक सीमित रखेगी। इस बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में 10-15% की वृद्धि देखी जा सकती है। सरकार का मुख्य ध्यान बड़े टैक्स छूटों के बजाय ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, विनिवेश और निजी निवेश को आकर्षित करने पर होगा।
भारत वित्त वर्ष 2026 को 7.4% की मजबूत जीडीपी वृद्धि और 2% के आसपास की स्थिर महंगाई के साथ समाप्त कर रहा है। आगामी बजट में सरकार डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, न्यूक्लियर एनर्जी और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए पीएलआई (PLI) योजनाओं का विस्तार कर सकती है। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए भारी इंसेंटिव दिए जाने की संभावना है ताकि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य 2031 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को 81% से घटाकर 50% पर लाना है।
ट्रंप के टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने अपनी रणनीति बदल दी है। बजट में एमएसएमई (MSME) और निर्यात क्षेत्रों को राहत देने के साथ-साथ सरकार ब्रिटेन और ओमान जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने पर जोर दे रही है। यूरोपीय संघ के साथ बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता इस दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इसके अतिरिक्त, सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 25,060 करोड़ रुपये के विशेष मिशन की तैयारी की है।
बैंकिंग और मौद्रिक नीति के मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से उम्मीद की जा रही है कि वह फरवरी की पॉलिसी में ब्याज दरों में कटौती के बजाय बाजार में नकदी (Liquidity) के प्रवाह को संतुलित करने को प्राथमिकता देगा। फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और भारतीय बॉन्ड यील्ड में स्थिरता यह संकेत देती है कि आरबीआई फिलहाल ‘रुको और देखो’ की नीति अपना सकता है। सरकारी बॉन्ड की भारी आपूर्ति को देखते हुए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) सबसे प्रभावी उपकरण साबित हो सकते हैं।
बजट 2026 केवल आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि यह भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बिठाने की एक बड़ी कोशिश होगी। जहाँ एक ओर ग्लोबल चुनौतियों से निपटना सरकार की प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति देना भी अनिवार्य है।
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