Unnao Case
Unnao Case Update: उत्तर प्रदेश का बहुचर्चित उन्नाव बलात्कार मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले के मुख्य दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने न्याय व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शनिवार को पीड़िता ने अपनी मां के साथ दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मुख्यालय पहुंचकर एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की और तत्कालीन जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने की मांग की। पीड़िता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने आरोपियों को फायदा पहुंचाने के लिए साक्ष्यों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की थी।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में सीधे तौर पर जांच अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उसका आरोप है कि तत्कालीन आईओ ने पद का दुरुपयोग करते हुए कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत की। पीड़िता का कहना है कि जांच प्रक्रिया को इस तरह से घुमाया गया ताकि अदालत में आरोपियों को ‘बेनिफिट ऑफ डाउट’ यानी संदेह का लाभ मिल सके। पीड़िता ने शनिवार को सीबीआई दफ्तर में अपनी छह पन्नों की विस्तृत शिकायत सौंपी, जिसमें उन्होंने अधिकारी के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश के तहत मामला दर्ज करने का आग्रह किया है।
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला आरोप स्कूल दस्तावेजों में हेरफेर का है। पीड़िता का दावा है कि जांच अधिकारी ने आरोपपत्र (चार्जशीट) में जाली स्कूल प्रमाण पत्र पेश किए। इन दस्तावेजों में पीड़िता को एक ऐसे सरकारी स्कूल की छात्रा दिखाया गया, जिसमें उसने कभी प्रवेश ही नहीं लिया था। आरोप है कि उसकी जन्मतिथि को भी गलत तरीके से पेश किया गया ताकि कानूनी धाराओं के प्रभाव को कम किया जा सके। पीड़िता का कहना है कि यह सब बेईमानी और दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया ताकि सेंगर को अनुकूल परिणाम मिल सकें।
पीड़िता ने सीबीआई को बताया कि चार्जशीट में कई तथ्य ऐसे शामिल किए गए हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। जांच अधिकारी ने उल्लेख किया था कि पीड़िता ‘हीरा सिंह’ नामक महिला के मोबाइल फोन का उपयोग कर रही थी, जबकि पीड़िता ने स्पष्ट किया है कि उसने वह फोन कभी छुआ तक नहीं। इसके अलावा, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई गवाहों के बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और कुछ झूठे बयान अपनी मर्जी से जोड़ दिए गए। पीड़िता ने कहा कि उन्होंने पहले भी इस संबंध में शिकायत की थी, लेकिन तब उनकी बात अनसुनी कर दी गई।
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने और उन्हें सशर्त जमानत देने के फैसले से पीड़िता का परिवार बेहद डरा हुआ है। पीड़िता ने दावा किया कि जमानत के बाद से ही उसे और उसके परिवार को अलग-अलग पक्षों से लगातार धमकियां मिल रही हैं। हालांकि, सेंगर अभी जेल में ही रहेंगे क्योंकि वे पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं, लेकिन उनकी जमानत ने पीड़िता के मानसिक हौसले पर चोट की है।
सीबीआई दफ्तर के बाहर पत्रकारों से रूबरू होते हुए पीड़िता ने अपना दर्द साझा किया। उसने कहा, “जांच अधिकारी ने मेरे हितों के खिलाफ काम किया। उन्होंने दूसरे पक्ष को जिताने के लिए साजिश रची ताकि मैं हार जाऊं, मेरा हौसला टूट जाए और मैं मामले को आगे न बढ़ा सकूं।” पीड़िता ने बताया कि वह किसी वरिष्ठ अधिकारी से मिलना चाहती थी, लेकिन छुट्टी होने के कारण उसकी शिकायत एक जूनियर अधिकारी ने ली है। अब उसे सोमवार को फिर से बुलाया गया है, जहां वह अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखने की तैयारी में है।
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