UNSC Permanent Seat
UNSC Permanent Seat: एशिया की दो महाशक्तियों, भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की लंबे समय से लंबित आकांक्षाओं के प्रति एक नरम और सकारात्मक रुख अपनाया है। बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को समझता है और सुरक्षा परिषद में उसकी स्थायी सदस्यता की इच्छा का सम्मान करता है। इस बयान को दोनों पड़ोसी देशों के बीच जमी बर्फ के पिघलने और भविष्य में सहयोग के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण बदलाव की पृष्ठभूमि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में तैयार हुई। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों ने सीमा विवाद से लेकर वैश्विक शासन सुधारों तक के कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने स्पष्ट रूप से अपनी ग्लोबल प्राथमिकताओं को रखा, जिस पर चीनी प्रतिनिधियों ने अपनी प्रतिक्रिया में भारत की बढ़ती जिम्मेदारियों को स्वीकार किया। यह संवाद दर्शाता है कि दोनों देश अब केवल विवादों पर नहीं, बल्कि भविष्य के वैश्विक ढांचे पर भी बात करने के लिए तैयार हैं।
चीन का यह बयान महज एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बदलती हुई वैश्विक राजनीति का परिणाम माना जा रहा है। भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की एक सशक्त आवाज बनकर उभरा है। चीन को इस बात का अहसास है कि भारत को अब लंबे समय तक वैश्विक निर्णयों से बाहर रखना संभव नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रियता और कई देशों के साथ उसके मजबूत रणनीतिक संबंधों ने चीन को अपनी पुरानी ‘वीटो’ वाली अड़ियल छवि को बदलने पर मजबूर किया है।
हालांकि चीन ने ‘सम्मान और समझ’ की बात कही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसे पूर्ण समर्थन मान लेना जल्दबाजी होगी। UNSC में सुधार एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें वीटो पावर और सदस्यता विस्तार पर कई देशों के अपने-अपने हित जुड़े हैं। चीन का यह रुख फिलहाल द्विपक्षीय तनाव को कम करने और एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश हो सकता है। यदि चीन भविष्य में भारत के पक्ष में मतदान करता है, तो यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार होगा और भारत को विश्व पटल पर वह स्थान मिलेगा जिसका वह हकदार है।
भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार न केवल इन दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए आवश्यक है। विदेश सचिव और चीनी उप विदेश मंत्री की यह मुलाकात इस दिशा में एक ठोस कदम है। यदि चीन अपनी कथनी को करनी में बदलता है, तो आने वाले वर्षों में एशिया की ये दो ताकतें मिलकर एक नई वैश्विक व्यवस्था की नींव रख सकती हैं। फिलहाल, दिल्ली और बीजिंग के बीच संवाद का यह सिलसिला जारी रहना क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद सुखद संकेत है।
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