राजनीति

UP Cabinet Portfolio Allocation : यूपी में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा, जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

UP Cabinet Portfolio Allocation :  उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट विस्तार के बाद आखिरकार लंबे समय से प्रतीक्षित मंत्रियों के विभागों का आधिकारिक बंटवारा कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय की मंजूरी के बाद जारी की गई नई सूची के अनुसार, योगी सरकार ने हाल ही में कैबिनेट में शामिल हुए सभी 8 मंत्रियों को उनके नए विभागों की अहम जिम्मेदारी सौंप दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नए फेरबदल और विभागों के आवंटन में वरिष्ठ नेताओं के पुराने प्रशासनिक अनुभव, उनकी जातिगत पृष्ठभूमि और राज्य के क्षेत्रीय समीकरणों का बहुत ही बारीकी से और खास ख्याल रखा गया है।

मंत्रियों की नई सूची: कैबिनेट से लेकर राज्य मंत्रियों तक के विभागों का पूरा ब्योरा

लंबे इंतजार के बाद सरकार द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, नए मंत्रियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है:

  • भूपेंद्र चौधरी (कैबिनेट मंत्री): इन्हें प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग की कमान दी गई है।

  • मनोज पांडेय (कैबिनेट मंत्री): इन्हें सीधे आम जनता से जुड़े खाद्य एवं रसद विभाग की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • अजीत सिंह पाल (राज्य मंत्री – स्वतंत्र प्रभार): इन्हें खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग का स्वतंत्र प्रभार मिला है।

  • सोमेंद्र तोमर (राज्य मंत्री – स्वतंत्र प्रभार): इन्हें सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल (PRD) विभाग का जिम्मा दिया गया है।

  • कृष्णा पासवान (राज्य मंत्री): इन्हें पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग में राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है।

  • कैलाश सिंह राजपूत (राज्य मंत्री): इन्हें ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

  • सुरेंद्र दिलेर (राज्य मंत्री): इन्हें प्रदेश के राजस्व विभाग में राज्य मंत्री का कार्यभार सौंपा गया है।

  • हंसराज विश्वकर्मा (राज्य मंत्री): इन्हें भूपेंद्र चौधरी के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग में संबद्ध किया गया है।

विकास कार्यों में आएगी गति: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीं उज्ज्वल शुभकामनाएं

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रशासनिक गलियारों में विभागों के इस नए और संतुलित बंटवारे के बाद यह माना जा रहा है कि शासन के कामकाज में अब पहले से कहीं अधिक तेजी और पारदर्शिता आएगी। विशेष रूप से राज्य के मुख्य आधार माने जाने वाले MSME, खाद्य एवं रसद तथा ऊर्जा जैसे जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण और बड़े विभागों में नए तथा ऊर्जावान मंत्रियों की नियुक्ति होने से रुके हुए विकास कार्यों और नई योजनाओं को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। सूची जारी होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यक्तिगत रूप से सभी नए मंत्रियों से मुलाकात की और उन्हें उनके नए प्रशासनिक दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

आठ दिनों का सस्पेंस: दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद बनी सहमति

योगी सरकार के इस बड़े कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के आवंटन की प्रक्रिया में पूरे 8 दिनों का लंबा वक्त लगा, जिसने राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस बढ़ा दिया था। दरअसल, 10 मई 2026 को हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद से ही मंत्रियों के मंत्रालयों की पसंद को लेकर भीतर ही भीतर भारी कशमकश और मंथन का दौर जारी था। इसी गतिरोध और सस्पेंस को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अचानक देश की राजधानी दिल्ली का रुख करना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ बंद कमरे में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लंबी मैराथन बैठक की। इस शीर्ष स्तरीय बैठक में गहन विमर्श के बाद ही विभागों की इस अंतिम सूची पर अंतिम मुहर लग सकी।

हाई-प्रोफाइल मंत्रालयों की चर्चा: साल 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी बीजेपी की नजर

इस पूरी कवायद और प्रशासनिक फेरबदल के दौरान राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य बेहद हाई-प्रोफाइल विभागों को लेकर हो रही थी, जो वर्तमान में सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ही सुरक्षित हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इस बात को लेकर उत्सुकता चरम पर थी कि क्या इन बड़े विभागों में भी कोई बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। हालांकि, पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई इस हाई-लेवल बैठक का मुख्य मकसद सिर्फ नए मंत्रियों को विभाग बांटना नहीं था, बल्कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (2027) के मद्देनजर सरकार और संगठन (पंकज चौधरी की टीम) को एक नया, आक्रामक और सर्वव्यापी कलेवर देना भी था। भारतीय जनता पार्टी का मुख्य फोकस सूबे में सत्ता की ‘हैट्रिक’ लगाने के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह दुरुस्त करना है ताकि विपक्ष को घेरा जा सके।

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