UP Politics : उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर तीखा हमला बोला है। राय ने आरोप लगाया कि बसपा सुप्रीमो ने बसपा संस्थापक कांशीराम जी की पुण्यतिथि को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाने के लिए मंच बनाया है।

“दलित समाज अब कांग्रेस के साथ”
अजय राय ने कहा कि अब देश और बिहार के दलित समाज को यह स्पष्ट रूप से समझ आ गया है कि राहुल गांधी संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि भाजपा संविधान विरोधी कार्यों में लिप्त है। उन्होंने दावा किया कि बिहार चुनाव में दलितों का झुकाव तेजी से कांग्रेस की ओर बढ़ रहा है।“आज कांशीराम जी की पुण्यतिथि भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए मनाई गई है। बिहार में दलित समाज कांग्रेस के साथ आ रहा है, उन्हें समझ आ गया है कि राहुल गांधी संविधान के लिए लड़ रहे हैं।” – अजय राय

“दानिश अली का अपमान हुआ, मायावती क्यों चुप रहीं?”
राय ने भाजपा सांसद रमेश विधूड़ी द्वारा कांग्रेस सांसद दानिश अली को संसद में अपमानित किए जाने की घटना को उठाते हुए मायावती पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह एक सीधा संविधान विरोधी कृत्य था, लेकिन मायावती एक बार भी न तो संसद में, न सार्वजनिक रूप से और न ही व्यक्तिगत तौर पर दानिश अली के समर्थन में सामने आईं।“भाजपा के सांसद ने दानिश अली जी को अपमानित किया, उनके लिए कौन खड़ा हुआ? मायावती एक बार भी मिलने के लिए गईं?”
“बसपा नेता भी कांग्रेस के साथ”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि बसपा के कई पुराने नेता अब कांग्रेस और राहुल गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उनके साथ खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस सबका सम्मान करती है,” और यही कारण है कि अलग-अलग वर्ग और समुदायों से कांग्रेस को समर्थन मिल रहा है।
मायावती और भाजपा पर ‘गुप्त समझौते’ के आरोप
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजय राय का यह बयान एक रणनीतिक हमला है, जिसमें बसपा को भाजपा की ‘बी-टीम’ साबित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि मायावती की चुप्पी या नरमी भाजपा को लाभ पहुंचाती है, खासकर तब जब विपक्ष को एकजुट होने की जरूरत होती है।अजय राय के इस बयान से साफ है कि बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक को लेकर कांग्रेस आक्रामक रणनीति अपना रही है। राहुल गांधी की संविधान यात्रा और दलित मुद्दों पर उनका फोकस कांग्रेस को नए सिरे से दलित समुदाय के बीच स्थापित करने की कोशिश है। वहीं, मायावती पर अप्रत्यक्ष भाजपा सहयोगी होने के आरोपों से बसपा की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
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