UP Election 2027
UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। नेताओं की बयानबाजी और सोशल मीडिया पोस्ट ने चुनावी समर का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इटावा में निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थापित होने वाली भगवान श्री राम की ‘अभिराम’ मूर्ति की तस्वीर साझा की। अखिलेश की इस ‘राम भक्ति’ ने प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। बीजेपी ने इसे सपा का हृदय परिवर्तन नहीं बल्कि चुनावी मजबूरी करार दिया है। इस तस्वीर के वायरल होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं।
अखिलेश यादव के ट्वीट पर पलटवार करने में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जरा भी देरी नहीं की। उन्होंने एक लंबा-चौड़ा सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर समाजवादी पार्टी की घेराबंदी की। मौर्य ने इसे सपा की ‘अवसरवादी’ राजनीति का नया चेहरा बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में अतीत की कड़वी यादों को कुरेदते हुए आरोप लगाया कि जिस पार्टी के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे लगे हों, वह आज भक्ति का स्वांग रच रही है। डिप्टी सीएम का इशारा सीधे तौर पर 1990 के दशक की उन घटनाओं की ओर था, जिसने यूपी की राजनीति की दिशा बदल दी थी।
केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की नियत और निष्ठा पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सपा की आस्था वास्तव में हिंदू प्रतीकों के प्रति जागृत हुई है, तो उन्हें श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। मौर्य ने पूछा कि क्या अखिलेश यादव मथुरा में ईदगाह हटाकर भव्य मंदिर निर्माण का समर्थन करेंगे? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपा बहादुर इस वक्त भारी दुविधा में हैं। एक तरफ वे रामभक्तों का विश्वास जीतना चाहते हैं और दूसरी तरफ अपने पुराने वोट बैंक को खिसकने से बचाना चाहते हैं, जो अब असंभव लग रहा है।
यूपी के डिप्टी सीएम ने 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ी भविष्यवाणी भी कर दी। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सपा के इस ‘दिखावटी’ चेहरे को पहचान चुकी है। मौर्य के अनुसार, आने वाले चुनावों में समाजवादी पार्टी को न तो हिंदुओं का समर्थन मिलेगा और न ही अल्पसंख्यकों का साथ। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि 2027 के नतीजों के बाद सपा के पास केवल सैफई में ही स्थान बचेगा। बीजेपी का मानना है कि अखिलेश यादव की यह कवायद केवल बहुसंख्यक मतदाताओं को रिझाने का एक असफल प्रयास है, जो वोट में तब्दील नहीं होगा।
फिलहाल, केशव प्रसाद मौर्य के इस तीखे हमले पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि अखिलेश यादव अब बीजेपी के ‘हिंदुत्व’ के कार्ड का जवाब ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ और विकास के मिश्रण से देना चाहते हैं। केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण और वहां प्रभु राम की मूर्ति की स्थापना इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। 31 मार्च 2026 की इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यूपी की राजनीति पूरी तरह से मंदिर और मूर्तियों के इर्द-गिर्द घूमने वाली है।
उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता हमेशा से ही धार्मिक ध्रुवीकरण और जातीय समीकरणों से होकर गुजरता है। अखिलेश यादव का राम की मूर्ति पोस्ट करना यह दर्शाता है कि अब वे बीजेपी को उसी के पिच पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सपा को उनके अतीत की याद दिलाकर इस नैरेटिव को ध्वस्त कर देगी। आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और भी उग्र होने के आसार हैं, क्योंकि 2027 की लड़ाई अब केवल विकास पर नहीं, बल्कि ‘असली बनाम नकली’ भक्त पर सिमटती दिख रही है।
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