UP Peon Relatives :
UP Peon Relatives : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे और ट्रेजरी सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है. यह कहानी किसी बड़े रसूखदार अधिकारी की नहीं, बल्कि एक मामूली चपरासी इल्हाम-उर्र-रहमान शम्सी की है. इल्हाम की आधिकारिक नियुक्ति बीसलपुर के एक इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर थी, लेकिन अपनी पैठ और जुगाड़ के दम पर उसने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में अपना अटैचमेंट करा लिया. यहीं से उसने सरकारी खजाने में सेंध लगाने की वह साजिश रची, जिसने 8 सालों तक विभाग की आंखों में धूल झोंके रखी. उसने ट्रेजरी और वेतन बिलों की प्रक्रिया की खामियों को समझा और उनका इस्तेमाल अपने निजी बैंक बैलेंस को भरने में किया.
इल्हाम ने सरकारी सिस्टम के भीतर एक समानांतर व्यवस्था खड़ी कर ली थी. उसने बड़ी चतुराई से फर्जी ‘बेनेफिशियरी आईडी’ तैयार कीं और कागजों पर अपने परिवार के सदस्यों व करीबियों को फर्जी शिक्षक और बाबू बना दिया. वह स्वयं ही सैलरी के टोकन जनरेट करता और सरकारी धन को सीधे अपने सिंडिकेट के खातों में ट्रांसफर कर देता. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि उसने कुल 53 संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल कर लगभग 8.15 करोड़ रुपये की हेराफेरी की. इस धनराशि में केवल वेतन ही नहीं, बल्कि स्कूलों के निर्माण कार्यों के नाम पर निकाला गया बजट भी शामिल था. जांच अधिकारियों के होश तब उड़ गए जब उन्होंने पाया कि करोड़ों रुपये की यह रकम चपरासी ने अपनी सास, साली और तीन पत्नियों के खातों में भेजी थी.
इल्हाम की अपराध गाथा सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसकी निजी जिंदगी भी फरेब और विलासिता से भरी थी. उसने तीन शादियां की थीं—अर्शी खातून, अजारा खान और लुबना. चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों पत्नियां अलग-अलग शहरों (बुलंदशहर, संभल आदि) में रहती थीं और वे एक-दूसरे के अस्तित्व से पूरी तरह अनजान थीं. इल्हाम ने खुद को एक प्रभावशाली बिजनेसमैन के रूप में पेश किया था. वह अपनी पत्नियों और प्रेमिकाओं को महंगे फ्लैट, जेवर और लग्जरी गाड़ियां गिफ्ट करता था. उसकी दूसरी पत्नी अजारा ने पूछताछ में बताया कि उसे इल्हाम की अन्य शादियों के बारे में जरा भी भनक नहीं थी. उसने सरकारी धन की बदौलत एक ऐसा ‘लग्जरी लाइफस्टाइल’ जिया जो किसी बड़े उद्योगपति का होता है.
फरवरी 2026 में इल्हाम का यह आठ साल पुराना काला साम्राज्य तब धराशायी हो गया जब बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर को एक संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई दिया. ट्रेजरी से एक साथ 1.15 करोड़ रुपये एक निजी खाते (अर्शी खातून) में भेजे गए थे. मैनेजर ने तत्काल इसकी जानकारी पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को दी. डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की. जांच में सामने आया कि DIOS कार्यालय के कंप्यूटरों का उपयोग कर पिछले कई वर्षों से फर्जी बिल बनाए जा रहे थे. मास्टरमाइंड के रूप में इल्हाम का नाम उजागर होते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और परत-दर-परत उसकी करतूतें सामने आने लगीं.
पुलिस ने अब तक इल्हाम के परिवार और सिंडिकेट की 7 महिलाओं (पत्नियों, सास और साली) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. विभाग ने विभिन्न बैंक खातों में जमा 5.50 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया है. हालांकि, मुख्य आरोपी इल्हाम ने चतुराई दिखाते हुए हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली थी, लेकिन पुलिस अब उसकी जमानत निरस्त कराने और इस बड़े गबन की पूरी राशि वसूलने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है. एएसपी विक्रम दहिया के मुताबिक, यह अकेले एक चपरासी के बस की बात नहीं थी; इस महाघोटाले में शिक्षा विभाग के कुछ अन्य बाबू और अधिकारियों की मिलीभगत की भी गहनता से जांच की जा रही है.
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