UP Waqf News
UP Waqf News : उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए एक बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ (UMMEED) पोर्टल पर संपत्तियों के सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। दस्तावेजों में गंभीर खामियों के चलते अब तक 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को निरस्त कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम को कागजातों में ऐसी विसंगतियां मिली हैं जिन्हें कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पोर्टल पर दर्ज कुल 1,18,302 वक्फ संपत्तियों में से अब तक केवल 53,711 संपत्तियों को ही अंतिम स्वीकृति मिल पाई है। वहीं, 20,546 संपत्तियां ऐसी हैं जिनके दस्तावेजों की जांच अपने आखिरी चरण में चल रही है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 31,192 संपत्तियों के वक्फ दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। इस कार्रवाई की जद में कई प्राचीन कब्रिस्तान, ऐतिहासिक दरगाहें और धार्मिक स्थल भी शामिल हैं, जिससे उन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
सत्यापन प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्रेशन रद्द होने के कई तकनीकी और कानूनी कारण सामने आए हैं। इनमें सबसे प्रमुख वजह राजस्व अभिलेखों (भूलेख) और वक्फ बोर्ड के डेटा के बीच ‘खसरा नंबर’ का आपस में मेल न खाना है। इसके अलावा, संपत्तियों के रकबे (क्षेत्रफल) में भारी अंतर पाया गया है। कई मामले ऐसे भी दिखे जहां एक ही संपत्ति को सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्डों में दर्ज करा दिया गया था। दस्तावेजों में तकनीकी त्रुटियां और दशकों पुरानी गलतियां भी इस निरस्तीकरण का मुख्य कारण बनी हैं।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन बड़े पैमाने पर निरस्त किए गए हैं। इस कार्रवाई में जौनपुर जिला सबसे आगे है, जहां 1,938 संपत्तियों का पंजीकरण रद्द हुआ है। इसके बाद बाराबंकी में 1,521, मुजफ्फरनगर में 1,510, अलीगढ़ में 1,061 और बस्ती में 1,000 संपत्तियों पर गाज गिरी है। अन्य प्रभावित जिलों में उन्नाव (908), सीतापुर (906), हरदोई (891), आजमगढ़ (886) और राजधानी लखनऊ (875) शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में आवेदन खारिज हुए हैं।
नियमों के मुताबिक, पंजीकरण की समय सीमा को आगे बढ़ाने की व्यवस्था बेहद सीमित है। वक्फ ट्रिब्यूनल उत्तर प्रदेश सुन्नी और शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की अपील पर पहले ही छह महीने का अतिरिक्त समय दे चुका है, जिसकी अंतिम तारीख आगामी 5 जून को समाप्त हो रही है। यदि मुतवल्ली इस अवधि के भीतर सही दस्तावेजों के साथ दोबारा आवेदन नहीं करते हैं, तो ये संपत्तियां पोर्टल से पूरी तरह बाहर हो जाएंगी। इसके बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से ट्रिब्यूनल के चक्कर काटने होंगे, जो एक बेहद जटिल और लंबी कानूनी प्रक्रिया है।
उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अंतर्गत लगभग 1.26 लाख से अधिक वक्फ संस्थान संचालित होते हैं। यह पूरी डिजिटाइजेशन प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा जून 2025 में शुरू किए गए ‘उम्मीद’ पोर्टल के जरिए की जा रही है। हाल ही में 5 अप्रैल को लागू हुए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत सभी वक्फ संपत्तियों का इस पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि संपत्तियों के रख-रखाव में जवाबदेही तय की जा सके।
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