Middle East Conflict
Middle East Conflict : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में चल रही उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने तेहरान स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक बेहद गोपनीय और अंडरग्राउंड मुख्यालय को हवाई हमले में पूरी तरह जमींदोज कर दिया है। इस सैन्य ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल किए गए ‘एडवांस्ड बंकर-बस्टर’ बम रहे। ये विशेष बम जमीन की गहराई में कंक्रीट की मोटी परतों के नीचे छिपे ठिकानों को भी नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इस हमले ने ईरान की सैन्य सुरक्षा और उसके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले किलों की अभेद्यता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घातक हमले की कमान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के हाथों में थी। बताया जा रहा है कि सेंटकॉम के चीफ एडमिरल ब्रैड कूपर के सीधे आदेश के बाद इस रणनीतिक मिशन को शुरू किया गया। ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने अपने सबसे आधुनिक और घातक ‘B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स’ विमानों को मैदान में उतारा। इन विमानों ने लंबी दूरी तय कर ईरान की राजधानी तेहरान के करीब स्थित इस सीक्रेट कमांड सेंटर को निशाना बनाया। यह ठिकाना केवल एक दफ्तर नहीं था, बल्कि IRGC के वरिष्ठ कमांडरों की रणनीतिक बैठकों का मुख्य केंद्र था, जहां से पूरे क्षेत्र में आतंकी और सैन्य गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था।
घटनास्थल से आ रही खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने इस बार ‘डबल स्ट्राइक’ की क्रूर लेकिन प्रभावी युद्धनीति अपनाई। पहले जबरदस्त धमाके के बाद जब ईरान की बचाव टीमें और रेस्क्यू कर्मचारी मलबे में दबे लोगों को निकालने पहुंचे, ठीक उसी समय दूसरा हमला किया गया। इस रणनीति के कारण नुकसान का दायरा काफी बढ़ गया है। आशंका जताई जा रही है कि इस हमले में IRGC के कई हाई-प्रोफाइल कमांडरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचावकर्मी भी मारे गए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने पिछले एक दशक में अपने परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को बचाने के लिए जो अंडरग्राउंड सुरंगें बनाई थीं, उन्हें केवल इन खास बमों के जरिए ही भेदा जा सकता था।
इस हमले के पीछे की पटकथा कुछ समय पहले ही लिखी जा चुकी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई से पहले ईरान को बहुत सख्त लहजे में चेतावनी दी थी। ट्रंप ने दो-टूक कहा था कि अगर ईरान ने अपनी भड़काऊ गतिविधियां बंद नहीं कीं, तो अमेरिका उसे एक ही रात में पूरी तरह तबाह करने की ताकत रखता है। ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा स्रोतों, गैस प्लांट और जल आपूर्ति केंद्रों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने बुधवार तक होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को खोलने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन कूटनीति की डेडलाइन खत्म होने से पहले ही ट्रंप ने सैन्य शक्ति के इस्तेमाल का फैसला ले लिया।
इस हमले के बाद व्हाइट हाउस और पेंटागन के रुख से स्पष्ट है कि अमेरिका अब पीछे हटने के मूड में नहीं है। अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में साफ कर दिया कि ईरान पर अमेरिकी हमले अभी थमे नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो बस शुरुआत है और आने वाले दिनों में अमेरिकी हमले और भी अधिक भीषण और डरावने हो सकते हैं। इस बयान ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच यह सीधा टकराव अब एक पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।
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