US Airstrike Syria
US Airstrike Syria: वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब दक्षिण-पश्चिम एशिया के मुस्लिम देश सीरिया पर एक बड़ा हवाई हमला करने का आदेश दिया है। इस एयरस्ट्राइक में अमेरिकी सेना ने अल-कायदा से जुड़े एक खूंखार सीनियर लीडर को मार गिराया है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम वैश्विक राजनीति में हलचल मचा रहा है और इससे कई पड़ोसी देशों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। वाशिंगटन का कहना है कि यह हमला उन ताकतों को कड़ा संदेश है जो अमेरिकी हितों और उनके सैनिकों को निशाना बनाने की हिमाकत करते हैं।
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, शुक्रवार को उत्तर-पश्चिमी सीरिया में किए गए इस लक्षित हमले में ‘बिलाल हसन अल-जासिम’ की मौत हो गई है। जासिम अल-कायदा से संबद्ध एक अनुभवी आतंकवादी नेता था। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जासिम का सीधा संबंध पिछले महीने हुए उस ‘इस्लामिक स्टेट’ (IS) के हमले से था, जिसमें दो अमेरिकी सार्जेंट और एक नागरिक दुभाषिया मारे गए थे। इस हमले को उन शहीदों के प्रति एक बड़ी सैन्य श्रद्धांजलि और न्याय के रूप में देखा जा रहा है।
CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि तीन अमेरिकियों की मौत में शामिल आतंकी का खात्मा हमारी उस अटूट दृढ़ता को दर्शाता है, जिसके तहत हम अपनी सेनाओं पर हमला करने वालों का पीछा करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी अमेरिकी नागरिकों या योद्धाओं पर हमला करने की साजिश रचेगा, उसके लिए दुनिया के किसी भी कोने में छुपने की जगह नहीं होगी। कूपर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम आपको ढूंढ लेंगे और खत्म कर देंगे।”
यह ताजा हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को फिर से संगठित होने से रोकना है। सीरिया में तानाशाही नेता बशर अल-असद के सत्ता से हटने के एक साल बाद, वहां सुरक्षा की स्थिति नाजुक बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि आईएस के “ठगों” को कुचलना न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। अमेरिकी सेना अब स्थानीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इन उग्रवादी समूहों के खिलाफ गठबंधन को मजबूत कर रही है।
सीरिया में अमेरिका और उसके सहयोगियों, जैसे जॉर्डन, ने मिलकर “हॉकआई स्ट्राइक” नामक एक बड़ा ऑपरेशन चलाया है। इस मिशन के तहत अब तक इस्लामिक स्टेट के बुनियादी ढांचे और हथियारों से संबंधित 100 से अधिक ठिकानों को तबाह किया जा चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा है कि अमेरिकी सेना तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक क्षेत्र से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता। हालांकि, सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरआ ने इन हमलों पर अपनी गहरी नाराजगी और व्यथा व्यक्त की है, जिससे कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह सैन्य रुख उनकी “अमेरिका फर्स्ट” और आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति को दर्शाता है। वेनेजुएला के बाद सीरिया में इस बड़े हमले ने यह साबित कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन सैन्य शक्ति के उपयोग से पीछे नहीं हटेगा। इस एयरस्ट्राइक के बाद रूस और ईरान जैसे देशों की प्रतिक्रिया पर भी दुनिया की नजर है, जो सीरियाई मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि “हॉकआई स्ट्राइक” मध्य पूर्व की शांति और स्थिरता में कितनी सहायक सिद्ध होती है।
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