अंतरराष्ट्रीय

US Cuba Conflict 2026 : डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंचा पेंटागन का प्लान, क्या अमेरिका-क्यूबा में छिड़ेगी जंग?

US Cuba Conflict 2026 :  विश्व राजनीति में एक बार फिर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। ‘पॉलिटिको’ की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका एक और नए युद्ध में कूदने की पूरी तैयारी कर रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने क्यूबा के खिलाफ एक बड़े सैन्य ऑपरेशन का पूरा खाका तैयार कर लिया है। इस संवेदनशील और गोपनीय प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेज दिया गया है। यदि राष्ट्रपति ट्रंप इस योजना को अपनी हरी झंडी दे देते हैं, तो अमेरिका और क्यूबा के बीच सीधे सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत हो सकती है। गौरतलब है कि साल 2026 में अमेरिका पहले ही दो अन्य देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है।

आर्थिक और राजनीतिक दबाव बेअसर होने पर सैन्य विकल्प

शुरुआती दौर में ट्रंप प्रशासन को यह पूरी उम्मीद थी कि क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बाद वहां स्वतः ही सत्ता पलट हो जाएगा। अमेरिका का मानना था कि भारी आर्थिक और राजनीतिक दबाव के आगे क्यूबा की सरकार घुटने टेक देगी, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद अमेरिका वहां की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को हिलाने में पूरी तरह नाकाम रहा। जब प्रतिबंधों का कोई ठोस असर नहीं दिखा, तो अब ट्रंप प्रशासन अंतिम विकल्प के रूप में सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसी रणनीति के तहत पिछले कुछ समय से अमेरिका ने कैरिबियन जलक्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है।

कैरेबियन सागर में अमेरिकी युद्धपोतों और ड्रोनों का जमावड़ा

इस बड़े सैन्य मिशन की तैयारियों के तहत मई महीने में अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली ‘यूएसएस निमित्ज एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ कैरेबियन सागर में पहुंच चुका है। इस लड़ाकू बेड़े के साथ कई आधुनिक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और क्रूजर जहाजों को भी तैनात किया गया है। ये युद्धपोत जमीन पर अचूक और सटीक मिसाइल हमले करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी खुफिया ड्रोन और आधुनिक निगरानी विमान पिछले कई महीनों से क्यूबा की हवाई सीमाओं के आसपास लगातार चक्कर काट रहे हैं और वहां की हर सैन्य गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं।

क्यूबा पर हमले के पीछे अमेरिका के असली कारण

बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की। रुबियो ने तर्क दिया कि अमेरिका की मुख्य भूमि के बिल्कुल नजदीक स्थित एक अस्थिर देश अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने बताया कि क्यूबा इस समय भारी आंतरिक अस्थिरता और संकटों से जूझ रहा है। इसके साथ ही, हाल के दिनों में क्यूबा के भीतर चीन का दखल और प्रभाव तेजी से बढ़ा है, जिसने अमेरिका को सतर्क कर दिया है। चीन ने क्यूबा के साथ कई रणनीतिक समझौते किए हैं। दूसरी ओर, वेनेजुएला पर अपना प्रभाव मजबूत करने के बाद, अब अमेरिका हर हाल में क्यूबा पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है।

‘सभी लोगों का युद्ध’ नीति है क्यूबा की असली ताकत

यदि अमेरिका क्यूबा पर हमला करता है, तो उसके लिए यह जंग कतई आसान नहीं होगी, क्योंकि क्यूबा की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘वॉर ऑफ ऑल द पीपल’ (सभी लोगों का युद्ध) नामक रक्षा नीति है। इस नीति का सीधा मतलब यह है कि यदि देश पर कोई विदेशी हमला होता है, तो केवल नियमित सेना ही नहीं, बल्कि देश का हर एक आम नागरिक, स्थानीय मिलिशिया और पैरामिलिट्री बल भी हथियार उठाकर सीधे युद्ध के मैदान में उतर जाएंगे। इस तरह अमेरिकी सेना को वहां कदम-कदम पर स्थानीय जनता के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।

क्यूबा का सैन्य ढांचा और गुरिल्ला युद्ध में महारत

सैन्य आंकड़ों की बात करें तो क्यूबा के पास वर्तमान में लगभग 50 हजार सक्रिय सैनिक, 39 हजार रिजर्व सैनिक और करीब 90 हजार अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री) के सदस्य मौजूद हैं। क्यूबा की सरकार ने ईरान की सैन्य रणनीति की तर्ज पर अपनी सेना को छोटे-छोटे स्वायत्त खांचों में विभाजित कर रखा है। युद्ध की स्थिति में सेना की ये टुकड़ियां मुख्य मुख्यालय के आदेश का इंतजार किए बिना, जमीनी हालात देखकर खुद बड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके अलावा क्यूबा को गुरिल्ला (गोरिल्ला) लड़ाई में बेहद माहिर माना जाता है। इतिहास गवाह है कि 1970 के दशक के आसपास क्यूबा ने इसी खतरनाक गोरिल्ला वॉर रणनीति के बल पर महाशक्ति अमेरिका को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

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