दोहा में अमेरिकी दूत कुश्नर और विटकॉफ की अहम बैठक के बावजूद ईरान के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं हुई, जिससे वैश्विक कूटनीति में नए सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या यह रणनीतिक दूरी है या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की शुरुआत होने वाली है क्या?
दोहा में अमेरिकी दूत कुश्नर और विटकॉफ की अहम बैठक के बावजूद ईरान के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं हुई, जिससे वैश्विक कूटनीति में नए सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या यह रणनीतिक दूरी है या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की शुरुआत होने वाली है क्या?

US Iran Doha Talks : कतर की राजधानी दोहा में इस समय उच्च-स्तरीय राजनयिक हलचल तेज है। अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ वर्तमान में दोहा में मौजूद हैं, जो क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर कतरी अधिकारियों और मध्यस्थों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी दूतों की यह यात्रा क्षेत्रीय जटिलताओं को सुलझाने के लिए है, जिसमें विशेष रूप से ईरान के साथ चल रहे तनाव और लेबनान संकट जैसे विषय शामिल हैं। प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि इन दूतों के दोहा आगमन का उद्देश्य ईरानी अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत या बैठक करना नहीं है।


इस यात्रा को लेकर अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया था कि ईरान ने स्वयं अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक का अनुरोध किया है, जो मंगलवार को दोहा में होनी है। वहीं, इसके ठीक विपरीत ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने आधिकारिक रूप से इन दावों का खंडन किया है। गरीबाबादी के अनुसार, ईरान का इस सप्ताह कतर में किसी भी अमेरिकी ‘तकनीकी टीम’ के साथ बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है। तेहरान ने जोर देकर कहा है कि वह किसी भी स्तर पर अमेरिका के साथ बैठक के लिए सहमत नहीं हुआ है।

क्षेत्रीय तनाव के बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की 6 अरब डॉलर की जो संपत्ति फ्रीज की गई थी, वह अभी तक तेहरान को स्थानांतरित नहीं की गई है। हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बढ़ते स्तर ने वैश्विक चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ से वैश्विक आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। सप्ताहांत में फारस की खाड़ी में हुए हमलों ने युद्ध को खत्म करने की दिशा में हो रही शांति वार्ता की संभावनाओं को एक बड़ी चुनौती के रूप में पेश किया है।
इन सभी राजनयिक उठा-पटक के बीच, अमेरिका और ईरान के बीच इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत तेहरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को नियंत्रित करने और कम करने के लिए प्रतिबद्ध किया गया है। बदले में, अमेरिका-समर्थित तेल प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया गया है। दोनों पक्षों को इस जटिल प्रक्रिया को एक व्यापक और स्थायी समझौते का रूप देने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है, जिस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। यह समयसीमा दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।



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