Hormuz Strait : ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के बीच, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी फिर से लागू करने का निर्णय लिया है। यह नाकाबंदी 14 जुलाई की शाम 4 बजे (ईस्टर्न टाइम) से प्रभावी हो गई है। पेंटागन के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कदम कमांडर इन चीफ के निर्देशों के बाद उठाया गया है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य उन जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करना है जो ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों का उपयोग कर रहे हैं, साथ ही उन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है जो नाकाबंदी के नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं।

पिछले रिकॉर्ड और अमेरिकी सेना की कार्यप्रणाली
अमेरिकी सेना ने इस नाकाबंदी को अचानक नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत लागू किया है। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि 13 अप्रैल से 18 जून के बीच भी इसी तरह की नाकाबंदी का सफल परीक्षण किया गया था। उस दो महीने की अवधि के दौरान, अमेरिकी नौसेना ने 140 से अधिक अनुपालन करने वाले जहाजों को वैकल्पिक सुरक्षित मार्गों पर सफलतापूर्वक पुनर्निर्देशित किया। इस दौरान मानवीय सहायता ले जाने वाले 50 से अधिक कमर्शियल जहाजों को निर्बाध रूप से गुजरने की अनुमति दी गई, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले नौ जहाजों को अमेरिकी बलों ने निष्क्रिय कर दिया था। यह डेटा दर्शाता है कि अमेरिका इस बार समुद्री सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्क है।

नाविकों के लिए सुरक्षा निर्देश और आधिकारिक दिशानिर्देश
क्षेत्र में कार्यरत सभी समुद्री नाविकों के लिए CENTCOM ने ‘नोटिस टू मरीनर्स’ (Notice to Mariners) जारी किया है। सभी जहाजों को सलाह दी गई है कि वे लगातार सुरक्षा अपडेट्स पर नजर रखें और संचार के लिए ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16 का उपयोग करें ताकि वे अमेरिकी नौसेना बलों से सीधा संपर्क कर सकें। कमांड ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वाणिज्यिक जहाजों के लिए विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश शीघ्र ही एक औपचारिक नोटिस के जरिए जारी किए जाएंगे, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में न्यूनतम बाधा आए।
शत्रुता का नया दौर और ट्रंप की ‘गार्जियन’ नीति
यह नवीनतम तनाव इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों के बाद उत्पन्न हुआ है। इसके जवाब में अमेरिका ने तेहरान के 140 रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा का जिम्मा उठाएगा। ट्रंप ने ‘द गार्जियन ऑफ द हॉर्मुज’ के रूप में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि अब इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा के बदले 20 प्रतिशत शुल्क (टैक्स) वसूला जाएगा, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बनी रहे और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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