US-Iran Ceasefire
US-Iran Ceasefire : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच दुनिया के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रहे खूनी संघर्ष के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस संघर्ष विराम की आधिकारिक घोषणा की। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान पर किए जाने वाले एक अत्यंत विनाशकारी हमले को फिलहाल रोक दिया है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा कुछ समय के लिए टल गया है।
इस ऐतिहासिक समझौते को धरातल पर उतारने में पाकिस्तान ने ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर खुशी जाहिर करते हुए इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने लिखा कि ईरान और अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ लेबनान और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे एक “दूरदर्शी कदम” बताया, जो न केवल इन दो देशों बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता लाने का काम करेगा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद आने का न्यौता दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस ‘निर्णायक समझौते’ की मेजबानी करने के लिए तैयार है। इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीजफायर की शर्तों को विस्तृत रूप देना और सभी लंबित विवादों का स्थायी समाधान निकालना है। शहबाज शरीफ को पूरी उम्मीद है कि ‘इस्लामाबाद वार्ता’ शांति के एक नए युग की शुरुआत करेगी और आने वाले दिनों में दुनिया को और भी सकारात्मक खबरें सुनने को मिलेंगी।
सीजफायर के ऐलान के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर वे ईरान पर बमबारी रोकने के लिए तैयार हुए हैं, लेकिन इसके बदले ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित रूप से व्यापार के लिए खोलना होगा। ट्रंप ने इसे एक “दोतरफा युद्धविराम” करार दिया है, जिसका अर्थ है कि यदि ईरान शर्तों का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका पुनः सैन्य कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगा।
तेहरान से भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आधिकारिक तौर पर दो सप्ताह के इस युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है। ईरानी नेतृत्व ने पुष्टि की है कि वे शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ टेबल पर बैठकर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 14 दिनों का समय दोनों देशों के लिए अपनी सैन्य और आर्थिक स्थिति को संभालने का एक मौका है। अब पूरी दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को होने वाली ‘इस्लामाबाद वार्ता’ पर टिकी हैं, जो वैश्विक सुरक्षा और तेल आपूर्ति के भविष्य को तय करेगी।
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