US Iran Ceasefire
US Iran Ceasefire : अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा का भारत सरकार ने औपचारिक रूप से स्वागत किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यह संघर्ष-विराम पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पुरानी स्थिति को दोहराते हुए कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल बातचीत, तनाव में कमी और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। विदेश मंत्रालय ने आशा व्यक्त की है कि इस अल्पकालिक युद्धविराम को जल्द ही एक स्थायी शांति समझौते में बदला जाएगा, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण बहाल हो सके।
भारत सरकार ने इस बात पर भी चिंता जताई कि लंबे समय से जारी इस संघर्ष ने न केवल मानवीय संकट पैदा किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक नेटवर्क को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत के लिए पश्चिम एशिया का यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि युद्धविराम के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के माध्यम से नौवहन (Shipping) की स्वतंत्रता फिर से बहाल होगी। इससे वैश्विक वाणिज्य का प्रवाह सुचारू रूप से चल सकेगा और तेल की कीमतों में आई अस्थिरता पर लगाम लगेगी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी राहत साबित होगी।
युद्धविराम के ऐलान के बाद सबसे बड़ी राहत उन भारतीय नाविकों को मिली है जो पिछले कई दिनों से समुद्र के बीच फंसे हुए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी में भारत के 16 जहाज वर्तमान में लंगर डाले खड़े हैं, जिन पर कुल 433 भारतीय नाविक सवार हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण ये जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। अब मार्ग खुलने के साथ ही ये जहाज भारत के लिए कूच करने की तैयारी कर रहे हैं। इन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों तक पहुँचने में तीन दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लग सकता है। भारत सरकार इन जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए निरंतर निगरानी कर रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही दी गई समय-सीमा (डेडलाइन) खत्म होने से मात्र 90 मिनट पहले सीजफायर का ऐलान कर सबको चौंका दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि ईरान के साथ सभी प्रमुख विवादित मुद्दों पर सहमति बन गई है। उन्होंने दावा किया कि अगले दो हफ्तों के भीतर इस समझौते के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। ट्रंप ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि उन्हें ईरान द्वारा ‘होर्मुज स्ट्रेट’ खोलने का भरोसा मिला है। इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम में उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता का भी जिक्र किया, जो इस शांति प्रक्रिया में एक नया मोड़ लेकर आया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्हें ईरान की ओर से एक 10 सूत्रीय प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसे उन्होंने बातचीत के लिए एक ‘व्यवहारिक और ठोस आधार’ माना है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने अपने सैन्य उद्देश्यों को पहले ही प्राप्त कर लिया है, इसलिए अब कूटनीति का रास्ता खोलना सही कदम है। 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली वार्ता अब इस बात की दिशा तय करेगी कि यह 14 दिनों का युद्धविराम एक स्थायी शांति संधि का रूप ले पाएगा या नहीं। फिलहाल, भारत सहित पूरी दुनिया इस कूटनीतिक जीत को पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों को छंटने की शुरुआत मान रही है।
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