US-Iran Talks in Oman
US-Iran Talks in Oman: आज ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता होने जा रही है। शुक्रवार का दिन पूरे मिडिल ईस्ट के लिए निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि कतर, तुर्किए और मिस्र की कड़ी मध्यस्थता के बाद दोनों देश बातचीत की मेज पर आने के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि, ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी की मेजबानी में होने वाली इस बैठक से पहले ही दोनों पक्षों के बीच एजेंडे को लेकर गहरे मतभेद उभर आए हैं। जहां दुनिया इस वार्ता से शांति की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं जमीनी हकीकत तनाव और सैन्य शक्ति प्रदर्शन से भरी हुई है।
बैठक की शुरुआत से ठीक पहले अरब सागर में स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है। अमेरिकी सैन्य बेड़े ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है, जिसे सैन्य विशेषज्ञ वार्ता से पहले अपनी ताकत दिखाने की रणनीति मान रहे हैं। अमेरिकी लड़ाकू विमान पहले से ही इस क्षेत्र में हाई अलर्ट पर तैनात हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि यह बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका ने ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के सीक्रेट बंकरों को टारगेट करने की योजना तैयार कर रखी है। जवाब में ईरान ने भी अपने नए अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर्स का खुलासा कर दुनिया को अपनी तैयारी का संकेत दे दिया है।
खाड़ी देशों (Gulf Countries) के बीच इस बात को लेकर गहरी आशंका है कि यदि ओमान की बैठक बेनतीजा रही, तो मिडिल ईस्ट में एक व्यापक युद्ध छिड़ सकता है। अमेरिका की ओर से जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व अब्बास अराघची कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की सेनाएं पहले ही आमने-सामने हैं और एक भी गलत कदम पूरे क्षेत्र को तबाही की ओर ले जा सकता है। खाड़ी देशों को डर है कि कूटनीति की विफलता का अर्थ केवल आर्थिक प्रतिबंध नहीं, बल्कि सीधे सैन्य टकराव होगा।
इस बैठक का सबसे जटिल हिस्सा वह एजेंडा है जिस पर दोनों पक्ष अड़े हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, ईरानी अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि उनकी मिसाइल शक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और यह चर्चा का विषय नहीं है। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है, जबकि अमेरिका और इजराइल इसे परमाणु हथियार विकसित करने की साजिश मानते हैं।
ईरान ने इस महत्वपूर्ण वार्ता के लिए ओमान को प्राथमिकता दी है क्योंकि ओमान के साथ उसके पुराने संबंध रहे हैं। इससे पहले भी परमाणु मुद्दों पर सीमित दायरे में बातचीत ओमान की धरती पर सफल रही है। ओमान की तटस्थ नीति उसे एक भरोसेमंद मध्यस्थ बनाती है। हालांकि, इस बार चुनौती कहीं अधिक बड़ी है क्योंकि मध्य पूर्व के समीकरण बदल चुके हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई पहले से कहीं अधिक गहरी हो चुकी है।
पूरी दुनिया की नजरें आज मस्कट की इस बंद कमरे में होने वाली बैठक पर टिकी हैं। यदि कोई समझौता होता है, तो इससे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है और वैश्विक बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन, यदि गतिरोध बना रहा, तो युद्ध के डर से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या कुशनर और अराघची अपनी पुरानी रंजिशों को भुलाकर कोई बीच का रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं।
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