US-Iran Crisis
US-Iran Crisis: 10 अप्रैल 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच जिस बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता की शुरुआत होनी थी, अब उस पर अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान में नियुक्त ईरानी राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) से अपना वह पोस्ट हटा दिया, जिसमें उन्होंने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद जाने की पुष्टि की थी। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान को अब मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान पर भरोसा नहीं रहा या वह इस्लामाबाद के बजाय किसी अन्य स्थान पर बातचीत करना चाहता है।
शांति वार्ता में तनाव का एक मुख्य कारण लेबनान का मुद्दा भी है। अमेरिका और इजरायल इस बात पर अड़े हुए हैं कि वर्तमान सीजफायर में लेबनान को शामिल नहीं किया गया है। दूसरी ओर, ईरानी राजदूत मोगदम ने अपने अब डिलीट हो चुके पोस्ट में दावा किया था कि इजरायल ने लेबनान में सीजफायर का उल्लंघन किया है, इसके बावजूद ईरान बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने को तैयार था। अब पोस्ट के हटने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान इजरायल की आक्रामकता और अमेरिका के रुख को लेकर अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रहा है।
सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। पाकिस्तान खुद को इस संघर्ष में एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जेडी वेंस की इस्लामाबाद में एक बड़ी बैठक की तैयारी चल रही है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस दिशा में सक्रिय हैं। असीम मुनीर ने जहां ट्रंप से बात की है, वहीं शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से संपर्क साधा है।
शांति वार्ता की अटकलों के बीच व्हाइट हाउस ने बुधवार (8 अप्रैल 2026) को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। व्हाइट हाउस के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान निर्धारित समय से आगे बढ़ रहे हैं और वे अपने मुख्य सैन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के करीब हैं। हालांकि, वॉशिंगटन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे तेहरान के साथ ‘सार्थक बातचीत’ जारी रखना चाहते हैं। इस वार्ता टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे प्रभावशाली नाम शामिल किए गए हैं, जो ट्रंप प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है।
ईरानी राजदूत के बदले हुए रुख ने पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ईरान को डर है कि पाकिस्तान पर अमेरिकी दबाव बहुत अधिक है? या फिर ईरान वार्ता की मेज पर बैठने से पहले कुछ और रियायतें चाहता है? 10 अप्रैल की समयसीमा बेहद नजदीक है और अगर यह वार्ता रद्द होती है, तो मध्य पूर्व में चल रहा यह संघर्ष और अधिक भयावह रूप ले सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान और वॉशिंगटन के अगले आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच यह शांति वार्ता केवल दो देशों का मामला नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और विश्व शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि इस्लामाबाद में यह बैठक सफल होती है, तो यह डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। लेकिन ईरान की हिचकिचाहट और इजरायल का लेबनान पर कड़ा रुख इस शांति की राह में कांटों की तरह खड़ा है। अगले 24 घंटे इस ऐतिहासिक वार्ता के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।
LSG vs KKR IPL 2026 : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांचक मुकाबले में…
Raghav Chadha Gen-Z Party: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची आंतरिक उथल-पुथल और नेतृत्व…
US-Iran Crisis: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी विनाशकारी युद्ध को रोकने और एक स्थायी…
Mumbai Airport Fire: मुंबई के व्यस्ततम छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) के टर्मिनल-1 पर…
Abu Sayed Case Verdict: बांग्लादेश में पिछले साल हुए 'जुलाई विद्रोह' के पहले शहीद, अबू…
Apple Foldable iPhone : टेक जगत में लंबे समय से जिस घड़ी का इंतजार था,…
This website uses cookies.