US-Iran War Alert
US-Iran War Alert: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक दरार अब एक बड़े सैन्य टकराव में बदलती नजर आ रही है। जनवरी के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए एक सख्त बयान ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अमेरिका के सबसे विशाल और शक्तिशाली युद्धपोत ईरान की ओर कूच कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इन घातक हथियारों के इस्तेमाल की नौबत न आए, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका ने मध्य पूर्व (Middle East) में अपनी सैन्य उपस्थिति को अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँचा दिया है। वाशिंगटन का यह कदम ईरान की घेराबंदी करने और उसे अपनी शर्तों पर झुकाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिकी सेना की इस भारी तैनाती पर ईरान ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान को ‘ताकत की भाषा’ से डराया नहीं जा सकता। अराघची के अनुसार, अमेरिका चाहे कितने भी विमान वाहक पोत या लड़ाकू विमान क्षेत्र में तैनात कर ले, ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती तादाद ईरान के लिए कोई नया खतरा नहीं है और ईरानी सेना किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।
बीबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपने परमाणु ऊर्जा संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln को तीन मिसाइल विध्वंसक युद्धपोतों के साथ अरब सागर में तैनात कर दिया है। इस बेड़े के साथ लगभग 5,700 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को भी इस अशांत क्षेत्र में भेजा गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने इन जहाजों की तस्वीरें जारी कर ‘शक्ति के माध्यम से शांति’ (Peace through Strength) का संदेश देने की कोशिश की है। इसके अलावा, होरमुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास समुद्री बारूदी सुरंगों को नष्ट करने वाले विशेष जहाज भी स्टैंडबाय पर रखे गए हैं, ताकि तेल आपूर्ति का रास्ता बाधित न हो सके।
सिर्फ समंदर ही नहीं, बल्कि आसमान में भी अमेरिका और उसके सहयोगियों ने घेराबंदी मजबूत कर ली है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने घातक F-15 लड़ाकू विमान, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10 थंडरबोल्ट हमलावर विमानों की टुकड़ी तैनात की है। इस मोर्चे पर ब्रिटेन भी पीछे नहीं है; ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स ने कतर के सैन्य ठिकानों पर अपने टाइफून फाइटर जेट्स को अलर्ट मोड पर रखा है। साथ ही, संभावित मिसाइल हमलों से बचने के लिए अमेरिका ने थाड (THAAD) और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। व्यापारिक जहाजों को भी चेतावनी दी गई है कि वे ईरानी समुद्री सीमा से दूर रहें और किसी भी ईरानी जांच का हिस्सा न बनें।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने अपनी मांगों की फेहरिस्त बहुत स्पष्ट रखी है। उन्होंने मांग की है कि ईरान तत्काल प्रभाव से अपना यूरेनियम संवर्धन (Uranium Program) रोके, अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे और क्षेत्रीय उग्रवादी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय व सैन्य मदद पर रोक लगाए। दूसरी ओर, ईरान इन आरोपों को नकारते हुए कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन जैसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। दोनों देशों के बीच यह गतिरोध दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक संकट का कारण बन सकती है।
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